28.5.11

बहुत होते हैं यारो चार दिन भी - रघुपति सहाय फिराक़



भाई नवीन चंद्र चतुर्वेदी जी ने हमें जनाब तुफ़ैल चतुर्वेदी जी की शायरी पढ़वाई और हमने उनकी शायरी को ‘मुशायरे‘ में पेश भी किया। इसी सिलसिले में उनकी तरफ़ से एक ईमेल मिली जिसमें कुछ अच्छे शेर लिखे हुए थे। जिस ईमेल में काम की बातें होती हैं, उन्हें मैं डिलीट नहीं करता। सो इसे भी डिलीट नहीं किया और उनके भेजे अशआर को मैं आपके साथ शेयर कर रहा हूं।

अनवर भाई, तीन शेर , आप से मित्रवत शेयर कर रहा हूँ:-

ये माना, ज़िन्दगी है चार दिन की
बहुत होते हैं यारो चार दिन भी
:- रघुपति सहाय फिराक़ 

न सताइश (प्रशंसा) की तमन्ना, न सिले की परवाह
गर नहीं है मेरे अशआर में मानी (अर्थ) न सही
:- मिर्ज़ा ग़ालिब

एक ज़माना यह भी था देहात में सुख का
लोग खुले रखते थे घर के सब दरवाज़े 
:- सुरेश चंद्र शौक़

1 टिप्पणी:

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

शुक्रिया अनवर भाई, अच्छी बातें शेयर करने में आप को भी मजा आता है, जान कर अच्छा लगा

क्या इन टोटको से भर्ष्टाचार खत्म हो सकता है ? आप देखिए कि अन्ना कैसे-कैसे बयान दे रहे हैं? शरद पवार भ्रष्ट हैं। भ्रष्टाचार पर बनी जीओएम (मंत्रिसमूह) में फला-फलां और फलां मंत्री हैं। इसलिए इस समिति का कोई भविष्य नहीं है। पवार को तो मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे देना चाहिए। पवार का बचाव करने की कोई जरूरत नहीं है। अगर पवार के मंत्रिमंडल से बाहर हो जाने से भ्रष्टाचार