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26.6.11

नवजात कन्याओं से छुटकारा पाने के आसान उपाय!


नवजात कन्याओं से छुटकारा पाने के आसान उपाय!


राजस्थान पत्रिका में छपने वाले विज्ञापन का शीर्षकराजस्थान पत्रिका ने एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। मकसद है कन्या हत्या रोकना। नवजात बच्चियों को जन्मते ही मार डालने की कुप्रथा पर विराम लगाना। पर इस विज्ञापन के बारे में कई पत्रकारों की राय है कि राजस्थान पत्रिका इस विज्ञापन की आड़ में कहीं न कहीं जाने या अनजाने में ही कन्या हत्या को बढ़ावा देने का काम कर रहा है। तर्क यह कि राजस्थान पत्रिका अखबार ने कन्या हत्या रोकने के लिए कन्या हत्या करने के पारंपरिक सभी तरीकों को विस्तार से बताया है और आखिर में एक छोटी सी अपील की है कि कन्या हत्या रोकें। क्या इसे जायज कहा जा सकता है? कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने पहली बार इस विज्ञापन के जरिए जाना कि नवजातों की हत्या इस तरह की जाती है या की जा सकती है।
ये तरीके कहीं न कहीं आपके दिमाग के कोने में दर्ज हो जाते हैं। हत्या के तरीकों का इतने विस्तार से वर्णन करना अपराध है। इन लोगों को कहना है कि हत्या के तरीके बताकर आप कहीं न कहीं शैतानी दिमाग या कच्चे दिमाग वाले मनुष्यों को और ज्यादा प्रशिक्षित कर रहे हैं, उकसा रहे हैं, आजमाने की प्रेरणा दे रहे हैं, और इस तरह, इस कुप्रथा को बढ़ावा देने में मददगार साबित हो रहे हैं। उधर, राजस्थान पत्रिका से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि दरअसल यह विज्ञापन पढ़ते समय आदमी के दिमाग में नवजात हत्या की प्रथा के प्रति घृणा पैदा होती है। उन्हें पता चलता है कि मासूमों को कितनी बेरहमी से इन सामान्य तरीकों के जरिए मार दिया जाता है। इस तरह यह विज्ञापन मनुष्य को जाग्रत करता है, संवेदनशील बनाता है, नवजात कन्या हत्या के प्रति घृणा से भर देता है। इस तरह यह विज्ञापन अपने मकसद में कामयाब है। विज्ञापनों के जरिए कोई सामान्य सी बात अलग तरीके से कही जाती है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की नजर पड़े। यह क्रिएटिव वर्क है और इस विज्ञापन के जरिए कन्या हत्या रोकने के संदेश को बेहद मार्मिक तरीके से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
आपकी क्या राय है? यह एक ऐसा संवेदनशील विषय है जिस पर हर किसी को अपना विचार व्यक्ति करना चाहिए ताकि इस बहस  के नतीजों से राजस्थान पत्रिका प्रबंधन को अवगत कराया जा सके और इस विज्ञापन को जारी करते रहने या रोकने के बारे में एक अनुरोध पत्र भेजा जा सके। नीचे राजस्थान पत्रिका में छपा विज्ञापन प्रकाशित किया जा रहा है। इसे देखें और अपनी राय इसी पोस्ट में कमेंट के जरिए दें।  -माडरेटर

राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित कन्या हत्या से संबंधित विज्ञापन

13.3.11

बेटी-भगवान की सर्वोत्तम कृति


बेटी-भगवान की सर्वोत्तम कृति



आज मैं बहुत खुश हूँ, और क्यो ना हूँ, मुझे धरती मे जाने का अवसर मिला है, वह धरती जिसकी मैं बस कल्पना करती थी,, ऐसा नहीं है की मैं यहा खुश नहीं थी, लेकिन धरती पर जाने का एहसास ही मुझे गुदगुदा देता है यहाँ तो हर तरफ बस खुशियां है, ज़रा धरती पे जा कर देखू तो सही, मुझे भी तो पता हो मानव रूप क्या है , मानव संसार क्या है,, बस रोमांच और खुशियो का एहसास लिए मैं माँ के गर्भ मे आ गयी !!



मेरा वजूद कुछ ही दिन का है लेकिन मैं महसूस कर सकती हूँ, मेरी दुनिया अभी सिर्फ मेरे माता पिता है, दोनों बहुत ही खुश है मेरे आने से और क्यो न हो मैं उनकी पहली संतान जो हूँ, मेरी माँ हर वक़्त मेरे ख़यालो मे खोयी रहती है, मेरे पिता भी हर वक़्त माँ का खयाल रखते है, मैं बस जल्दी से दुनिया मे आना चाहती हूँ ताकि अपने माता पिता को हर तरह की खुशिया दे सकूँ !! आज पापा ने माँ को कहा है कि तैयार रहना कल सुबह, हम लोग डॉक्टर के पास जाएंगे, चेकअप के लिए !!



माँ सुबह जल्दी से उठी डॉक्टर के पास जाने कि तैयारी करने लगी, पापा भी ऑफिस से जल्दी आ गए कितना खयाल था दोनों को मेरा,, डॉक्टर मे अच्छी तरह से जाच कि, इसके बाद डॉक्टर मेरी माँ और पिता जी को अपने केबिन मे ले गया और पिता जी से कुछ बताने लगा मैं समझ तो सकती न थी लेकिन महसूस कर रही थी , माँ का चेहरा उतरता जा रहा था और पिता जी खामोश थे,, मेरा मन घबराने लगा, मेरे माँ बाप / मेरी दुनिया / मेरे सब कुछ क्यो उदास है डॉक्टर ने क्या कहा सब जानने चाहती थी लेकिन कुछ समझ मे नहीं आता था , हम लोग क्लिनिक से वापस आ गए लेकिन लगता था सब बदल गया माँ का चेहरा उदास, पापा भी कुछ खाये बिना वापस ऑफिस चले, मेरा नन्हा सा मन कुछ नहीं समझ पा रहा था कि डॉक्टर न ऐसा क्या बता दिया है !! पापा जो पहले हर वक़्त मेरे बारे मे माँ से बात किया करते थे एकदम खामोश हो गए !! मेरा नन्हा मन बस हर वक़्त भगवान से प्रार्थना करता कि ए भगवान मेरे माता पिता की उलझन दूर कर दे उनकी खुशियो को वापस ला दे !!



कुछ दिनो से माँ लगातार डॉक्टर के पास जा रही थी , कभी अकेले, कभी पापा के साथ डॉक्टर उसकी तरह तरह कि जांच करते थे, फिर एक दिन माँ और पापा दोनों साथ मे डॉक्टर के पास गए, डॉक्टर बोला आप परेशान न हों, टेस्ट रिपोर्ट अच्छी है कोई परेशानी नहीं है बस इनको (माँ को ) एक दिन के लिए एड्मिट करना पड़ेगा आप जब चाहे आ सकते है लेकिन ज़्यादा देर करना ठीक नहीं है !! मैं बहुत खुश हो गयी, एक दिन एड्मिट होने से मेरी माँ की परेशानिया दूर हो गाएँगी,, माँ फिर से हंसने लगेगी , पिताजी खुश रहेंगे, लेकिन यह क्या माँ का चेहरा तो और उतर गया वह क्यो खुश नहीं है हे भगवान यह क्या पहेली है !!



आज पापा ने ऑफिस से वापस आ कर माँ को बोला कल चलना है एड्मिट होने फिर सब ठीक हो जाएगा, बस यह सुनते ही माँ रोने लगी, उसके आँसू रुकने का नाम ही न लेते थे,, पिता जी उसको समझा रहे थे, हाँ मेरी भी समझ मे कुछ आ रहा था, पिता जी कह रहे थे की हमारा फैसला सही है, यह लड़की है, और तुम को तो मालूम है की परिवार मे सब को लड़का चाहिए और मुझे भी, ज़रा समझ से काम लो अभी कुछ नहीं बिगड़ा है परिवार का फैसला ना मानना शायद तुमको भारी पड़ जाये,, अब मेरे समझ मे सारी बाते आ चुकी थी,, मेरे परिवार के दुख का कारण मैं थी जिसने अभी जनम भी नहीं लिया था, मैंने किसी का क्या बिगाड़ दिया अभी तो मुझे गर्भ मे आए कुछ दिन ही हुए फिर यह सब क्यो सिर्फ इस लिए की मैं बेटी हूँ !! मेरा मन बेहद दुखी था मैं समझ नहीं पा रही थी की लड़की होना पाप क्यो है शायद बेटियो ने दुनिया मे हमेशा गलत काम किए होंगे इस ही लिए दुनिया हमसे नफरत करती है,, हे भगवान आप ने मुझे लड़की क्यो बनाया क्यो पैदा होने से पहले ही मुझे नफ़रतों का शिकार बनने के लिए छोड़ दिया आप को जवाब देना होगा !!



अचानक मुझे महसूस हुआ जैसे कोई दिव्य शक्ति मेरे पास आई और कहा “बेटी तुम भगवान की सर्वोत्तम कृति हो, भगवान ने तुम्हें ममता / दया / करुणा / प्यार के साथ हिम्मत और ताकत भी दी है, उसने तुम्हें माँ / बहन / बेटी और पत्नी का रूप दिया है और सारा संसार इन रिश्तो मे समाया है ! तुमने तो भगवान दे दिये इन सभी रूपो को साकार किया है, कभी सीता बन कर राम के साथ वनवास लिया जो तुझे नहीं दिया गया था, कभी आसिया बन कर मूसा को फिराऊँ जैसे ज़ालिम से बचा कर पाला, कभी मरियम बनकर ईसा को जनम दिया, खातीजा बनकर मुहम्मद के सामने खड़ी हुयी, बेटी फातिमा बनकर उम्मे अबिहा का खिताब पाया, बहन जेनब बनकर कर्बला मे हुसैन के साथ रही,, तेरे पास तो गर्व करने के लिए सब कुछ है, बदकिस्मत है वह लोग जो तेरे मुकाम को तेरी महानता को नहीं जानते है, तू क्यो दुखी होती है, दुख और शर्म तो इनको आनी चाहिए जो इतना बड़ा पाप करने जा रहे है !”



यह सब सुन कर मेरा दुख जाता रहा, मैंने कहा ए मेरे मालिक, मुझे गर्व है की तुमने मुझे लड़की बनाया, बस जिन पवित्र औरतों का नाम तुमने लिया है उनही के सदके मे मेरे पिता को इस पाप से बचा लो, मेरी माता को जीवन भर की ग्लानि से बचा लो, मुझे खुद अपने पास वापस बुला लो, मैं एक बेटी हो कर कैसे अपने माँ / बाप को दुखी देख सकती हूँ उनके सर पर पाप का / आत्मग्लानि का बोझ कैसे देख सकती हूँ, मेरे मौला मेरी जान ले ले, मगर मेरा माता पिता पर कोई बोझ न डाल !

क्या इन टोटको से भर्ष्टाचार खत्म हो सकता है ? आप देखिए कि अन्ना कैसे-कैसे बयान दे रहे हैं? शरद पवार भ्रष्ट हैं। भ्रष्टाचार पर बनी जीओएम (मंत्रिसमूह) में फला-फलां और फलां मंत्री हैं। इसलिए इस समिति का कोई भविष्य नहीं है। पवार को तो मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे देना चाहिए। पवार का बचाव करने की कोई जरूरत नहीं है। अगर पवार के मंत्रिमंडल से बाहर हो जाने से भ्रष्टाचार