5.3.12

ये है मिशन लन्दन ओलंपिक !


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         आज  भारत  में  चारों ओर हॉकी  टीम ने  अपने प्रदर्शन से धूम मचा रखी है .८ वर्ष बाद ओलम्पिक में भाग लेने का ये जो सुनहरा अवसर भारतीय हॉकी   टीम ने हासिल किया है उसे लेकर  सारे भारत को उनसे बहुत आशाएं हैं और आज सारा भारत उनके लिए यही दुआ मांग रहा है कि २०१२ का हॉकी गोल्ड भारत को ही प्राप्त हो.

barbican weekender

                               हॉकी में भारत का विश्व में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है.मेजर  ध्यानचंद  हॉकी के जादूगर  की  उपाधि से नवाजे गए हैं .


Colors of IndiaColors of IndiaColors of India

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                 हॉकी भारतवर्ष के राष्ट्रीय खेल  का स्थान रखता है और पिछले कुछ समय के प्रदर्शन के कारण इस खेल पर जो  उँगलियाँ उठने लगी थी अब उन्हें झुकाने का समय भारतीय टीम ने हासिल किया है.और हमें पूरी आशा है कि भारतीय टीम ये स्वर्णिम अवसर कभी नहीं गवायेंगी.



Hockey team

                       भारतीय टीम को जोश से भरने हेतु ''शिखा कौशिक'' जी द्वारा स्वरबद्ध,स्वरचित ये गाना भी मैं यहाँ प्रस्तुत कर रही हूँ जिससे  मेरी  इस पोस्ट  की गुणवत्ता  में  अभिवृद्धि  होगी  और मैं ये मानती  हूँ  कि ये गाना भारतीय टीम में जोश भरने में और उन्हें सफलता  के  शीर्ष  पर पहुँचने  में भी अवश्य  मदद   करेगा .
                           ये  है मिशन  लन्दन ओलंपिक 

YE HAI MISSION LONDON OLYMPIC ! 
                                                     अंत में मैं अपनी भारतीय हॉकी टीम को यही कहना चाहूंगी -


 "कमाले  बुजदिली है पस्त होना अपनी आँखों में,
     अगर थोड़ी सी हिम्मत हो तो फिर क्या हो नहीं सकता.''
                                                                       चकबस्त.


                  ''ALL  THE  BEST  INDAIN  TEEM ''
                                शालिनी कौशिक 
[sabhi photos google se sabhar]

3.3.12

कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य: मेरी ब्रिज भूमि की होली

कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य: मेरी ब्रिज भूमि की होली: जय श्री कृष्णा फिर से दो दिन बचे है होली के फिर वही जाना है श्री कृष्ण के दरबार मे मा को फिर फोन पे दीवाली पे आन...

थिंक हट के...


कोई रूठे यहाँ तो कौन मनाने आता है 
रूठने वाला खुद ही मान जाता है, 
ऐ अनिश दुनियां भूल जाये कोई गम नहीं 
जब कोई अपना भूल जाये तो रोना आता है...
जब महफ़िल में भी तन्हाई पास हो 
रौशनी में भी अँधेरे का अहसास हो, 
तब किसी कि याद में मुस्कुरा दो 
शायद वो भी आपके इंतजार में उदास हो...
फर्क होता है खुदा और पीर में 
फर्क होता है किस्मत और तक़दीर में 
अगर कुछ चाहो और ना मिले तो 
समझ लेना कि कुछ और अच्छा है हाथो कि लकीर में.
नीलकमल वैष्णव"अनिश"
०९६३०३०३०१०, ०७५६६५४८८०० 

27.1.12

बसंत ऋतू की शुभकामनाएं...


आइये कुछ झलकियां तो देख लीजिए मित्र मेरे ब्लाग में बसंत पंचमी की...
"आप सभी को हार्दिक दिल से शुभकामनाएं बसंत पंचमी की"

साभार: गूगल वेब को चित्रों के लिए.

22.1.12

अपना दर्द....


आप सभी मित्रों के लिए पेश है नए साल(2012) का मेरा पहला पोस्ट
जिसमें तो दो अलग-अलग लाइने हैं पर दोनों कविता का अर्थ और दर्द एक ही है,


(१)
मुझे उदास देख कर उसने कहा ;
मेरे होते हुए तुम्हें कोई 
दुःख नहीं दे सकता,


"फिर ऐसा ही हुआ"
ज़िन्दगी में जितने भी दुःख मिले, 
सब उसी ने दिए.....
(२)
वो अक्सर हमसे एक वादा करते हैं कि;
"आपको तो हम अपना बना कर 
ही छोड़ेंगे"
और फिर एक दिन उन्होंने अपना
वादा पूरा कर दिया,


"हमें अपना बनाकर छोड़ दिया..."


नीलकमल वैष्णव"अनिश"

7.1.12

कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य: एक छलावा-सा

कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य: एक छलावा-सा: एक छलावा-सा 4 जुलाई 1942 को जन्मे कन्हैयालाल भाटी की अनुवादक के रूप में विशेष ख्याति रही है, मगर उनकी कहानियां भी कथ्य व शिल्प की दृष्टि से...

30.12.11

देखना, कोई औरत भगवान को छू न दे


देखना, कोई औरत भगवान को छू न दे

मार्केट से लौटते वक्त उस मंदिर के आगे रोज मेरे पांव ठिठक जाते हैं। औरतें दीवानों की तरह भीड़ लगाकर वहां खड़ी होती हैं। सूट वालियां भी, साड़ी वालियां भी और जींस वालियां भी। सब के सब एकता कपूर के सीरियल से सीधे भागकर आए हुए से। इतने रिलीजस लोग या तो उन सीरियलों में देख लो, या फिर उस मंदिर के आगे। कल आखिर मैंने झांक कर देख ही लिया कि आखिर कौन से भगवान का निवास है वहां। देखा तो बिल्कुल उस ऐड की तरह शॉक लगा, शॉक लगा, शॉक लगा। और एकदम सीरियल वाले स्टाइल दिल में एको हुआ - नहींईईईई.... ये क्या? अभी तक तो सिर्फ हनुमान जी के बारे में सुना था। शनिदेव तुम भी? यू टू? भेजा घूमा था, वहां लगे बोर्ड की वजह से। आप खुद ही पढि़ए - लिखा है महिलाएं दूर से ही दर्शन करें, मूर्ति को हाथ न लगाएं। (ओ तेरा भला हो)
 
हनुमान जी ब्रह्मचारी देवता हैं। औरतों से दूर ही रहते हैं, ये तो पता था। अजी, पता क्या था एक दिन एक मंदिर में जाकर पुजारी जी ने फेस-टु-फेस बोल ही दिया। बच्चे को लेकर कनॉट प्लेस वाले हनुमान मंदिर जाने की जिद थी ममी जी की, तो चल दिए आशीर्वाद लेने। पुजारी जी ने बच्चा गोद में लिया, एक सेकंड को रुके और ठां करके पूछ डाला - लड़की तो नहीं? हमने फौरन कोरस में पूरे कॉन्फिडेंस से कहा - नहीं नहीं, लड़का है, लड़का है। पुजारी जी ने राहत वाली स्माइल दी और बच्चे को लेकर चल दिए दर्शन कराने।

एनीवे, उस दिन हनुमान जी के बारे में सॉलिड ज्ञान मिला था कि वह कितना सीरियसली फीमेल्स से दूर रहते हैं। लेकिन शनि देव आप भी। आपसे तो मुझे सिम्पथी थी। आपके ओवर एस्टिमेटिड खौफ की वजह से। साढ़ेसाती और उसका बुरा असर एंड ऑल दैट स्टफ। मगर आपने भी औरतों को इनफीरियर ही समझा है। इसका रिलीजस कारण क्या है, मैं उसमें पडऩा नहीं चाहती पर मुझे इनफीरियॉरिटी का अहसास हुआ।

पर आप कुछ जानते भी हो शनिदेव? और आप भी सुनो हनुमान जी... जिन औरतों से आप देवता लोग दूर भागते हो, वही तो आपकी असली फॉलोअर हैं, वही तुम्हारी टीआरपी बढ़ाती हैं और वही असली व्यूअरशिप देती हैं। क्योंकि पुरुष तो खुद देवता होता है (नो ऑफेंस, लेकिन होता तो है ही, पतिदेव कहते तो हैं कुछ लोग, और वो करवा चौथ के दिन तो देवत्व अपने पीक पर होता है, हालांकि उनकी टीआरपी भी लेडीज ही बढ़ाती हैं)। इन पुरुषों का बस चले तो आपको जीरो व्यूअरशिप वाला कोई टीवी प्रोग्राम बनाकर रख छोड़ें। यकीन नहीं तो पूछ लो किसी भी ऐवरेज पुरुष से। धर्म और भगवान के नाम पर लड़ाई तो कर लेंगे, लेकिन पत्नी और परिवार व्रता तुलसी टाइप बीवी जब ऑफिस से शाम को जल्दी घर आने को कहती है कि हवन रखा है और तुम्हें पूजा में बैठना है तो इन्हीं से पूछो इनके दिल पर कितनी छुरियां चलती हैं।

या फिर आप इनसे पूछो कि इनमें से कितने पर्सेंट पुरुष आपके या दूसरे किसी भगवान का व्रत रखकर रोज सुबह घंटी और शंख बजाते हैं। सर्वे करवाओ, पता लगाओ, कंपेयर करो। अरे व्रत तो छोड़ो, घर में टाइम पर खाना न मिले तो राजेश खन्ना से अमरीश पुरी के कैरक्टर में घुसने में दो मिनट से ज्यादा नहीं लगते इन्हें। और अगर तुम्हें फैक्ट्स नहीं मालूम तो लेडीज़ को ऐसे पोस्टर चिपकाकर इनफीरियर होने का अहसास क्यों कराते हो भगवान जी।

सोचो, मेरी मौसी को कैसा लगा होगा उस दिन। मौसी मेरी एकदम भक्तन हैं। घर में बाथरूम से बड़ा तो मंदिर बनवाया है। हर हफ्ते भगवान की एक नई मूर्ति मुंहमांगे दाम चुकाकर लाती हैं। एक बार गांव जाकर बडे मंदिर में बड़ी-सी मूर्ति स्थापित करने की ठान ली। शायद बल्लभगढ़ से लाई थीं देवी माता की संगमरमर की मूर्ति 50 हजार में। पूरे तामझाम के साथ अपने ससुराल पहुंचीं, भंडारा लगाया, गांववालों के लिए भोज प्लान किया। मंदिर में मूर्ति पहुंचाई। पुजारी जी और घर के सभी पुरुष मंदिर पहुंचे, मगर अरे ये क्या मौसी जी, आप कहां घुस रही हैं मंदिर के अंदर? बाहर ही रुकिए,  पढ़ी-लिखी लगती हैं, इसीलिए नहीं मालूम कि देवी माता की मूर्ति स्थापना के वक्त लेडीज़ नॉट अलाउड। (पता नहीं, अब ये कौन से कोर्स में पढ़ाया जाता है, जो पुजारी जी ने उन्हें पढ़ा-लिखा गंवार बताया)। एनीवे, आप तो बस ये सोचो कि कैसा वाला शॉक लगा होगा मौसी जी को, वही ऐड वाला जिसमें सबके बाल 90 डिग्री में खड़े हो जाते हैं।

इतना गुस्सा क्यों, वाय, काइकू गॉड? अरे, ये तो समझो कि ये औरतें आपसे कितना प्यार करती हैं। और वैसे भी गुस्सा तो राक्षसों का गहना होता है, तो टेक अ चिल पिल गॉड।

29.12.11

एक वर्ष ने और विदा ली एक वर्ष आया फिर द्वार।

एक वर्ष ने और विदा ली
एक वर्ष आया फिर द्वार।
गए वर्ष को अंक लगाकर
नए वर्ष की कर मनुहार।आता है कुछ लेकर प्रतिदिन
जाता है कुछ देकर बोध।
मैं बैठा चुपचाप देखता
पनप रही पल-पल की पौध।
जाने क्या पाया जीवन ने
क्या खोया कर ले तू याद।
सोचा जितनी बार हुआ है
भीतर ही भीतर अवसाद।जीत रहा हूँ मैं जीवन को
अथवा हार रहा हर बार।
गए वर्ष को अंक लगाकर
नए वर्ष की कर मनुहार।नए वर्ष की जन्मकंुडलीऋ
सारभूत हैं भाव विभाव।
लग्नराशि संलग्न स्नेह से
ग्रहगण के मन में है चाव।
मुखमंडल पर दीप्त प्रभासित
सूर्य रश्मियों का तप तेज।
अंतर्मन में चंद्र विमोहन
प्रीति प्रेम को रहा सहेज।बाँच रहा हूँ भाग्य भवन को
जिससे आगत का उपहार।
गए वर्ष को अंक लगाकर
नए वर्ष की कर मनुहार।

21.12.11

भारत देश की मांओं और बहनों के नाम एक अपील


मेरी बहनों/मांओं ! क्या नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, शहीद भगत सिंह आदि किसी के भाई और बेटे नहीं थें ?
क्या भारत देश में देश पर कुर्बान होने वाले लड़के/लड़कियाँ मांओं ने पैदा करने बंद कर दिए हैं ? जो भविष्य में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और झाँसी की रानी आदि बन सकें. अगर पैदा किये है तब उन्हें कहाँ अपने आँचल की छाँव में छुपाए बैठी हो ? 
उन्हें निकालो ! अपने आँचल की छाँव से भारत देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करके देश को "सोने की चिड़िया" बनाकर "रामराज्य" लाने के लिए देश को आज उनकी जरूरत है.  मौत एक अटल सत्य है. इसका डर निकालकर भारत देश के प्रति अपना प्रेम और ईमानदारी दिखाए. क्या तुमने देश पर कुर्बान होने के लिए बेटे/बेटियां पैदा नहीं की. अपने स्वार्थ के लिए पैदा किये है. क्या तुमको मौत से डर लगता है कि कहीं मेरे बेटे/बेटी को कुछ हो गया तो मेरी कोख सूनी हो जायेगी और फिर मुझे रोटी कौन खिलाएगा. क्या नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आदि की मांओं की कोख सूनी नहीं हुई, उन्हें आज तक कौन रोटी खिलता है ? क्या उनकी मांएं स्वार्थी थी ?
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क्या इन टोटको से भर्ष्टाचार खत्म हो सकता है ? आप देखिए कि अन्ना कैसे-कैसे बयान दे रहे हैं? शरद पवार भ्रष्ट हैं। भ्रष्टाचार पर बनी जीओएम (मंत्रिसमूह) में फला-फलां और फलां मंत्री हैं। इसलिए इस समिति का कोई भविष्य नहीं है। पवार को तो मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे देना चाहिए। पवार का बचाव करने की कोई जरूरत नहीं है। अगर पवार के मंत्रिमंडल से बाहर हो जाने से भ्रष्टाचार