2.7.16

देश की अखण्डता के लिये देश के हर हिस्से में सभी धर्मो के लोगो का बिखराव जरूरी है

देश की अखण्डता के लिये देश के हर हिस्से में सभी धर्मो के लोगो का बिखराव जरूरी है

विवेक रंजन श्रीवास्तव विनम्र
अधीक्षण अभियंता सिविल, म प्र पू क्षे विद्युत वितरण कम्पनी
ओ बी ११ , विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर जबलपुर ४८२००८
फोन ०७६१२६६२०५२

        प्रश्न है देशों का निर्माण  कैसे हुआ  ?  भौगोलिक स्थितियो के अनुसार लोगो का रहन सहन लगभग एक समान ही होता है . नदियो , पहाड़ो , रेगिस्तानो जैसी प्राकृतिक बाधाओ ने प्राचीन समय में देशो की सीमायें निर्धारित की . इतिहास साक्षी है कि एक ही विचारधारा और धर्म के मानने वाले भी एक ही राज्य के झंडे तले एकजुट होते रहे . विस्तार वादी नीतीयो से जब युद्ध राजधर्म सा बन गया तो सेनाओ को एकजुट रखने में भी धर्म का उपयोग किया गया . पिछली सदी में जब दुनिया में लोकतांत्रिक मूल्यो का महत्व बढ़ा तो ,विस्तारवादी  युद्धो की वैश्विक भर्तसना होनी शुरु हुई . पर किंबहुना आज भी देशो के नक्शे  क्षेत्रो की भौगोलिक स्थिति  , राष्ट्रो की शक्तिसंपन्नता , वैचारिक और धार्मिक आधारो पर ही तय हो रहे हैं . भारत एक लोकतांत्रिक विश्व शक्ति है . हमारा संविधान हमें धार्मिक स्वतंत्रता देता है  .संविधान के अनुच्छेद (२५-२८) के अंतर्गत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार वर्णित हैं, जिसके अनुसार नागरिकों को  अंत:करण  और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्‍वतंत्रता, धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्‍वतंत्रता , किसी विशिष्‍ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए करों के संदाय के बारे में स्‍वतंत्रता तथा धार्मिक शिक्षा संस्‍थाओं में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थित होने के बारे में भारत के हर नागरिक को संविधान द्वारा स्‍वतंत्रता प्रदान की गई है .
        हमारा संवैधानिक स्वरूप धर्म निरपेक्ष है ,  किंतु फिर भी देश में राजनीति धर्म आधारित ही है . चुनावों में सरे आम धार्मिक ध्रुवीकरण के आधार पर वोटो का अंदाजा लगाकर पार्टियां उम्मिदवार तय करती हैं , मीडिया जातिगत वोटो की खुले आम चर्चा करता है पर चुनाव आयोग मौन रहता है ! मुझे लगता है देश में संविधान को गिने चुने लोगो द्वारा आम जनता पर थोपा गया है , यह ठीक रहा क्योकि संविधान व्यापक रूप से जनहितकारी है , पर जनमानस से ऐसे उदार संविधान की मांग  उठने से पहले ही संविधान बना दिया गया जिसके चलते आम आदमी संविधान के महत्व से अपरिचित है , और इतर संवैधानिक गतिविधियो में संलग्न है . आज जरुरत लगती है कि देश की जनता को संविधान से परिचित करवाने के लिये अभियान चलाया जाये . जिससे आज के युवा नागरिक भी अपने संविधान पर गर्व करें और तद्अनुसार आचरण करें .
        काशमीर से हिंदू पंडितो का विस्थापन , और अब उन्हें पुनः वहाँ बसाने को लेकर राजनीति गर्माई हुई है . पूर्वोत्तर के राज्यो में ईसाई धर्म का बाहुल्य है , और विदेशी ताकतें व ईसाई मिशनरियां धर्म के आधार पर वहां एकजुटता बनाकर देश विरोधी संगठन खडे करती रहती हैं . तमिलनाडु में धर्म के आधार पर ही श्रीलंका से सिंहली कनेक्शन रहे हैं , स्व राजीव गांधी की हत्या इसका ही दुष्परिणाम था . केरल में क्रिश्चेनिटी के कारण ही एक ही दल लगातार सत्ता पर बरसो से काबिज बना रहा है . हिंदी बहुल क्षेत्रो की बात की जाये तो धर्म ही नहीं  जाति के आधार पर भी ध्रुवीकरण की तस्वीर साफ दिखती है . बिहार और उत्तर प्रदेश में यादवो का बोलबाला है . उत्तर प्रदेश में राम मंदिर के निर्माण को मुद्दा बनाकर यदि चुनाव लड़ा जाये,   दलितो की अलग राजनैतिक पार्टी ही बन जाये और राजनेताओ द्वारा मुस्लिम तुष्टीकरण से वोट पाने की होड़ लगाई जाये तो मेरी समझ में यह संविधान का खुल्लम खल्ला मजाक है .जो सरे आम ताल ठोंककर राजनेता उड़ा रहे हैं व आम जनता दिग्भ्रमित है . गुजरात का पटेल आंदोलन तथा हरियाणा व राजस्थान का जाट आंदोलन ताजी तरीन बात है . १९५६ में जब प्रदेशो की पुनर्स्थापना की गई तो मध्य प्रदेश की राजधानी जबलपुर की जगह भोपाल में इसी आधार पर बनाई गई थी कि भोपाल में मुस्लिम बाहुल्य होने के कारण वहां राजधानी बनने से गैर मुस्लिमो की पदस्थापनायें हो और धार्मिक समरसता बन सके . किसी हद तक भोपाल के इस प्रयोग ने एक अच्छा उदाहण भी प्रस्तुत किया . आज भी धार्मिक दंगे उन्हीं क्षेत्रो में होते हैं जहां किसी एक धर्म या जाति का बाहुल्य है .आबादी की  धार्मिक समरसता व संतुलन  से मिलनसारिता बढ़ती ही है . ऐसा सारे देश में किया जाना जरूरी है .
        काश्मीर में हि्दू पंडितो के लिये  सैनिक सुरक्षा में अलग कालोनी बसाने की बात कुछ ऐसी है जैसे वहां के मुसलमान कोई जंगली जानवर हों ! मैं हाल ही काश्मीर घूम कर लौटा , यद्यपि यह सही है कि मैं वहां टूरिस्ट था और टूरिज्म आधारित व्यवसाय होने के कारण मेरे साथ संपर्क में आये मुसलमानो का व्यवहार हमारे प्रति अतिरिक्त रूप से उदार रहा होगा , पर जब एक ही शहर में रहना हो , साथ साथ जीना हो तो किसी जाति विशेष के लिये बिल्कुल अलग कालोनी बसाने के प्रस्ताव का कोई भी  समझदार व्यक्ति समर्थन नही कर सकता .काश्मीर में इस तरह की घटिया राजनीति करने की अपेक्षा वहां स्थाई रुप से इंफ्रास्ट्रक्चर डेवेलेपमेंट की आवश्यकता है . सरकारें वहां फोरलेन सड़कें बनवा दें  , बिजली व्यवस्था का सुढ़ृड़ीकरण  कर , टूरिज्म के विकास हेतु जरूरी कार्य कर  दें , बाकी सब वहां की जनता स्वयं ही कर लेगी . जब वहां रोजगार के पर्याप्त संसाधन होंगे तो वहां के युवा पढ़े लिखे मुसलमान विस्थापित हिन्दू  पंडितो को ही नहीं हर भारत वासी को धारा ३७० की अवहेलना करते हुये वहां अपने साथ बसने देंगे यह बात मैं काश्मीर में वहां के  लोगों से अनौपचारिक चर्चा के आधार पर कह रहा हूं . जैसे प्रयत्न अभी राजनेता कश्मीरी पंडितो को बसाने के लिये कर रहे हैं उससे तो स्थाई वैमनस्यता और वर्ग संघर्ष को जन्म मिलेगा . देश के अनेक शहरो में भी बंगलादेश से आये हुये शरणार्थियो की  अलग कालोनियां  बनी हुई हैं , या मुसलमानो ने या सिंधियो ने अनेक शहरो में क्षेत्र विशेष में अलग कोनो में बसाहट की हुई है . प्रशासन के लोग समझते हैं कि जहां भी इस तरह की असंतुलित आबादी की बस्तियां हैं वहां त्यौहार विशेष या धार्मिक असद्भाव फैलने पर कितनी कठिनाई से ला एण्ड आर्डर मेंटेन हो पाता है . गुजरात में बिल्डिंग विशेष उपद्रवियो का निशाना इसीलिये बन सकी क्योकि वहां धर्म विशेष के लोग रहते थे . मेरा सुझाव है कि कानून बनाकर जातिगत या धर्मगत आधार पर कालोनियो और बिल्डिंगो में  एक साथ एक ही वर्ग के लोगो को रहने पर रोक लगा देनी चाहिये . इस तरह के आवासीय ध्रुवीकरण की कल्पना तक संविधान निर्माताओ ने नही की होगी . वर्ग विशेष के लोग यदि इस तरह की आवास व्यवस्था में स्वयं को सुरक्षित मानते हैं तो ऐसी  परिस्थितियों के लिये विगत ७० वर्षो की राजनीति ही दोषी कही जायेगी .
        संविधान निर्माताओ के सपने का सच्चा धर्म निरपेक्ष भारत तभी वास्तविक स्वरूप ले सकता है जब सारे देश के हर हिस्से में सभी धर्मो के लोगो का स्वतंत्र बिखराव हो , यह देश की अखण्डता के लिये आवश्यक है . आशा है राजनेता क्षुद्र राजनीति से उपर उठकर देश के दीर्घ कालिक व्यापक हित में इस दिशा में चिंतन मनन और काम करेंगे . अन्यथा नई पीढ़ी के पढ़े लिखे लड़के लड़कियो ने जैसे आज विवाह तय करने में माता पिता और परिवार की भूमिका को  गौंण कर दिया है उसी तरह सरकारो को दरकिनार करके समाज को देश की धार्मिक अखण्डता के लिये स्वतः ही कोई न कोई कदम उठाना ही पड़ेगा .
       

24.11.15

हिंदी मासिक पत्रिका "ह्यूमन टुडे" के लिए रचनाये आमंत्रित

सभी ब्लॉगर मित्रों को नमस्कार
बहुत दिन बाद आप मित्रों के सम्मुख आने का मौका मिला , मित्रों नव प्रकाशित हिंदी मासिक पत्रिका "ह्यूमन टुडे " को सम्पादन करने की जिम्मेदारी मिली है. ऐसे में आपलोगों की याद आनी स्वाभाविक है. भले ही इतने दिनों तक गायब रहा लेकिन आपसे दूर नहीं , मैं चाहता हूँ की जो ब्लॉगर मित्र अपनी रचनाओ के माध्यम से मुझसे जुड़ना चाहते है , मै  उनका सहर्ष स्वागत करता हूँ।  सामाजिक सरोकारों से जुडी इस पत्रिका में आपकी रचनाओ का स्वागत है , जो मित्र मुझसे जुड़ना चाहते हैं वे अपनी रचनाएँ मुझे मेल करें। ।
humantodaypatrika@gmail.com
रचनाएँ राजनितिक , सामाजिक व् ज्ञानवर्धक हो। कविता , कहानी व विभिन्न विषयो पर लेख आमंत्रित।
harish singh ---- editor- Humantoday


22.11.15

क़ुरआनी नुस्ख़े से फ़ेल किडनी हो गईं ठीक

आजकल खाने-पीने में तेज़ाबी माददों और तनाव में बढ़ोतरी की वजह से किडनी अपने काम करने में फ़ेल हो रही है।
परहेज़ इलाज से बेहतर है।
जो बीमार हो चुके हैं, वे अपने बुरे अमल से तौबा करें यानि सही राह की तरफ़ पलटें।

सही राह क़ुरआन बताता है। जो लोग बीमार हो चुके हैं, क़ुरआन उनका इलाज भी बताता है और बहुत आसान बताता है।
अंग्रेज़ी तरीक़े से इलाज कराना सब के बस की बात नहीं है और जो लोग कराते हैं, उनके गुर्दे भी पहले की तरह नहीं हो पाते। वे अंग्रेज़ी दवा-इंजेक्शन पर ही टिके रहते हैं। जिनमें अक्सर ज़हर होता है जो कि गुर्दों को नुक़्सान ही देता है।
इस तरह नुक़्सान की चीज़ देकर नुक़्सान को दूर करने की कोशिश की जाती है, जो कि नाकाम ही रहती है।
क़ुरआन शहद में शिफ़ा बताता है। देखें क़ुरआन 16:68 व 69

डा. इमरान ख़ान की रिसर्च से एक कामयाब और आसान नुस्ख़ा उनके ही अल्फ़ाज़ में यहां दिया जा रहा है। इसे किसी माहिर हकीम-वैद्य की निगरानी में मरीज़ को इस्तेमाल कराएं और रब के नाम से मौज मनाएं।
इसके अलावा भी और बहुत से फ़ायदे आप इस नुस्ख़े में देख रहे हैं।
Honey is described as a cure all, a remedy for many ailments in the Quran. Honey
contains the pollen of many different flowers and also has enzymes from the bees
stomach. Honey will help all kinds of wounds, skin lesions, sunburns, gastric ulcers and
help in healing of all organs. Honey heals wounds and skin burns much better and
quicker than antibiotics. Honey given to chronic patients like arthritis will help resolve
the illness. Honey will kill super bugs like M.R.S.A . One thing honey has in it is a toxin
called botox or botulinum. So honey should not be given to infants, only should be given
after the age of two years. Honey acts like a natural antibiotic and antiviral. Skin burns
heal better with honey then any other medicine. Applied on the eyes honey can prevent
the progression of cataracts and applied on the face honey will clear up most skin lesions.
Regular application of honey on skin will lead to glowing red color of the skin. For skin
application honey can be mixed with olive oil at a 50/50 mix, then applied at night.
A four year old child had lost his kidney function due to excessive antibiotic called
Gentamycine. The child became swollen with no urine function, the baby was given
Honey + wax of the beehive twice a day and Apis (a homeopathic remedy made from the
honey bee) twice a day. Full kidney function returned in three days.
I prescribed Honey to a 2nd world war veteran, who had multiple surgeries and 20 years
of treatments that did not help his leg wounds. In week after he used honey complete
healing had taken place in the wound.
A woman in Egypt with end stage arthritis was injected with honey mixed in normal
saline and she regained complete function of her joints.
 
Book:Quranic Shifa, the hidden secrets & Prophets Medicine 
by Dr Imran Khan
Diplomate American Board of Neurology, 
Nanotech Medical Center Lahore.
Makkah. & Los Angles
(Third Edition) Dec 19, 2010
 

18.6.14

क्या गरीब और आम व्यक्ति को इन प्रश्नों का कभी जबाब मिलेगा ?

दोस्तों, मेरी खुली चुनौती है कि-कुछ ऐसे प्रश्न जिनका जबाब किसी राज्य सरकार व मोदी सरकार के साथ ही क्षेत्रीय  पार्षद, विधायक और सांसद से नहीं मिल सकता हैं, क्योंकि यहाँ सब कुछ  गोल-माल या जुगाड़ है.

1. क्या दिल्ली में उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी नगर निगम और दिल्ली पुलिस (क्षेत्रीय थाना) को बिना रिश्वत दिए अपना मकान बनाना संभव है ? यदि हाँ  तो कैसे ?

 

2. यदि किसी गरीब और आम व्यक्ति की अपने क्षेत्रीय पार्षद, विधायक और सांसद से कोई जान-पहचान या अन्य किसी के द्वारा सम्पर्क (जुगाड़ या सिफारिश) नहीं है तो क्या वो व्यक्ति अपना मकान (निर्माण कार्य) नहीं बना सकता है?

 

3. यदि उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी नगर निगम और दिल्ली पुलिस का कहना है  कि ऐसा कुछ (रिश्वत का लेन-देन) नहीं है तो आज उत्तम नगर सहित पूरी दिल्ली में क्षेत्रीय पार्षद, विधायक और सांसद सहित सभी राजनैतिक पार्टियों के जानकार व्यक्तियों और बिल्डरों द्वारा किया जा रहा निर्माण कैसे हो रहा है?

 

4. यदि आप अगर नीचे से लेकर ऊपर तक उनका मुंह मीठा (रिश्वत का लेन-देन) न करवाओ तो क्या आपके मकान को गिरा दिया जाता है या निर्माण कार्य बंद नहीं  करवा दिया जाता है?

 

5. क्या पूरी दिल्ली के क्षेत्रीय पार्षद, विधायक और सांसद के साथ ही दिल्ली नगर निगम का कोई अधिकारी इसका जबाब देगा ?

 

यदि हम सूत्रों की बात माने तो पूरे उत्तम नगर के पिनकोड 110059 (जिस में चार विधानसभा का क्षेत्र आता है) में लगभग 2000 मकानों का अवैध निर्माण हो रहा है. इस तरह से पूरी दिल्ली में एक अनुमान के अनुसार लगभग डेढ़ लाख मकानों का निर्माण हो रहा है. सूत्रों का कहना है कि-अपने मकानों का निर्माण करने के लिए आपकी ऊँची पहुँच होनी चाहिए, नहीं तो आप अपना मकान
ही बना सकते हैं. अवैध निर्माण कार्यों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश केवल कागजों पर सिमटकर रह जाते हैं या किसी गरीब व आम व्यक्ति पर ही लागू होते हैं. जो बेचारा अपना पेट काट-काटकर एक-एक पैसा जोड़कर अपने लिए छत बनाने की कोशिश करता है. अपनी राजनीति चमकाने के लिए राजनैतिक पार्टियों को कुछ कालोनियां अवैध नजर आती है और उनके लिए विकास कार्य अवैध नजर आते हैं. लेकिन जब इनको वहां से वोट लेनी होती है तब उन अवैध कालोनियों में रहने वालों की वोट क्यों नहीं अवैध दिखती हैं ?

दोस्तों, मैं तो अपने क्षेत्र के सांसद, विधायक, चारों पार्षद से पूछ रहा हूँ. देखते हैं क्या कोई जबाब मिलेगा या नहीं ? आप भी पूछे (जब मौत एक दिन आनी है फिर डर कैसा? सौ दिन घुट-घुटकर मरने से तो एक दिन शान से जीना कहीं बेहतर है. मेरा बस यहीं कहना है कि-आप आये हो, एक दिन लौटना भी होगा. फिर क्यों नहीं तुम ऐसा करो कि तुम्हारे अच्छे कर्मों के कारण तुम्हें पूरी दुनिया हमेशा याद रखें. धन-दौलत कमाना कोई बड़ी बात नहीं, पुण्य कर्म कमाना ही बड़ी बात है) और यदि इस पोस्ट का विषय सही लगा हो तो इस पोस्ट को शेयर करें.                                                                                             

(पार्षद-अंजू गुप्ता, मोहन गार्डन, वार्ड नं. 125)

 (पार्षद-नरेश बाल्यान, नवादा, वार्ड नं. 126)

(पार्षद-शिवाली शर्मा, उत्तम नगर, वार्ड नं. 127)

 (पार्षद-देशराज राघव, बिंदापुर, वार्ड नं. 128)


8.5.13

मैंने "आम आदमी पार्टी" से कहा कि-मुझे आपसे झूठ बोलकर "टिकट" नहीं लेना है

दोस्तों, मैंने "आम आदमी पार्टी" का उम्मीदवार चयन प्रक्रिया के तहत अपना फार्म भरकर भेजा है और उसके साथ अपना निम्नलिखित कवरिंग पत्र भेजा है. जिसमें मेरी संक्षिप्त विचारधारा के साथ थोडा सा जीवन परिचय देने का प्रयास किया है. आमने-सामने बैठने पर और उसकी विचारधारा से अवगत हुआ जा सकता है. लेकिन पत्र के माध्यम से अपनी विचारधारा से अवगत करवाने का प्रयास किया है. अब आप ही पढकर बताएँगे कि आम आदमी पार्टी के संयोजक श्री अरविन्द केजरीवाल तक अपनी विचारधारा कितने सही तरीके से पहुँचाने में कितना कामयाब हुआ हूँ या नहीं. अपनी विचारधारा के साथ अपने पत्र और आपके बीच में कोई बाधा न बनते हुए, फ़िलहाल अपनी लेखनी को यहीं पर विराम देता हूँ.
 
मिलें:-  श्री दिलीप पांडे (सचिव) चुनाव समिति
आम आदमी पार्टी
मुख्य कार्यालय:ए-119, ग्राऊंड फ्लोर, कौशाम्बी, गाजियाबाद-201010.
www. aamaadmiparty.org  Email id  :  info@aamaadmiparty.org
Helpline    :  9718500606 Facebook :  AamAadmiParty 
Twitter : @AamAadmiParty 


विषय:- उत्तम नगर विधानसभा उम्मीदवार के नाम का प्रस्ताव पत्र
स्क्रीनिंग कमेटी और श्री अरविन्द केजरीवाल जी,  

श्रीमान जी, मैं सबसे पहले आपको यहाँ एक बात साफ कर दूँ कि मुझे आपसे उत्तमनगर विधानसभा के उम्मीदवार के लिए "टिकट" झूठ बोलकर नहीं लेनी है. इसलिए मैंने अपने फार्म में अधिक से अधिक सही जानकारी देने का प्रयास किया है. मेरी ईमानदारी और सच्चाई के कारण यदि आप टिकट नहीं देते हैं तब मुझे कोई अफ़सोस नहीं होगा,  मगर आपसे झूठ बोलकर या गलत तथ्य देकर टिकट लेना मेरे "जीवन का लक्ष्य" नहीं है. झूठ बोलकर वो व्यक्ति टिकट लेगा, जिसको अपनी ईमानदारी और सच्चाई पर पूरा विश्वास नहीं होगा. माना कि सच्चाई की डगर पर चलना कठिन होता है. कहा जाता है कि-आसान कार्य तो सभी करते हैं, मगर मुश्किल कार्य कोई-कोई करता है. इसी सन्दर्भ में एक कहावत भी है कि-गिरते हैं मैदान-ए-जंग में शेर-ए-सवार, वो क्या खाक गिरेंगे, जो घुटनों के बल चलते हैं. आप की पार्टी (आम आदमी पार्टी) द्वारा विधानसभा उम्मीदवारों का विवरण प्राप्त करने के लिए प्रारूप (फार्म-ए) में यदि राज्य चुनाव आयोग के चुनाव उम्मीदवार के फार्म में शामिल कुछ प्रश्नों (कोलम) एवं प्रक्रिया को और जोड़ दिया जाता तो आपको हर विधानसभा क्षेत्र से आने वाले उम्मीदवारों के बारे में काफी अधिक जानकारी मिल सकती थी. चलिए अब जो हो गया है. उसको पीछे छोड़ते हुए अब आप पूरी दिल्ली के विधानसभा क्षेत्रों के लिए "अच्छे उम्मीदवारों" का चयन कर पाएँ. यहीं मेरी दिली तमन्ना है. आज अच्छे पदों हेतु केवल डिग्री या व्यक्ति के सामान्य ज्ञान की ही परीक्षा ली जाती है. आदमी में "इंसानियत"  है या नहीं. इस बात की परख नहीं की जाती है और इसका नतीजा अच्छा नहीं होता है. 
श्रीमान जी, जिस प्रकार लेखक मुंशी प्रेमचन्द की कहानी "परीक्षा" के पात्र बूढ़े जौहरी (पारखी) सरदार सुजान सिंह ने अपनी जिस सूझ-बुझ से रियासत के दीवान पद के लिए बुगलों (उम्मीदवारों) की भीड़ में से हंस (जो अपने विशिष्ट गुणों और सौंदर्य के आधार पर अलग होता है) यानि पंडित जानकीनाथ जैसे न्याय करने वाले ईमानदार, कर्त्तव्यनिष्ट उम्मीदवार का चयन कर लिया था. जिसके ह्रदय में साहस, आत्मबल और उदारता का वास था. ऐसा आदमी गरीबों को कभी नहीं सताएगा. उसका संकल्प दृढ़ है तो उसके चित्त को स्थिर रखेगा. वह किसी अवसर पर चाहे किसी से धोखा खा जाये. परन्तु दया और अपने धर्म से कभी पीछे नहीं हटेगा. उसी प्रकार आप और आपकी स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य यदि पूरी दिल्ली की विधानसभाओं के लिए "हंस" जैसे उम्मीदवारों का चयन कर पाए तो पूरी दिल्ली में आपकी पार्टी का राज हो सकता है. इस समय आप दो धारी तलवार की धार पर खड़े है. यदि आप की पार्टी ने किसी चमचागिरी या दबाब या लालचवश,  भेदभाव की नीति में उलझकर या धर्म या जाति समीकरण के आंकड़ों में उलझकर गलत व्यक्ति (बुगले) का चयन कर लिया तो आपको राष्ट्रीय स्तर पर काफी नुकसान होगा और आपकी छवि खराब होगी.  आपका सर्वप्रथम लक्ष्य अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझने वाला, दूरदृष्टि के साथ ही देश/समाज सेवा की भावना रखने वाले ईमानदार व्यक्ति (उम्मीदवार) का चयन करना ही होना चाहिए. जैसे अर्जुन को केवल मछली की आँख दिखाई देती थी. चुनाव में "हार" और "जीत" को इतने मायने न दें. बल्कि अपने आदर्शों और सिध्दांतों के साथ चुनाव मैदान में अपने उम्मीदवारों को उतारे. इससे आम आदमी प्रभावित होगा. बाकी जैसी आपकी मर्जी, क्योंकि आपकी पार्टी है. आप चाहे जैसे करें. यह आपके विवेक पर निर्भर है. 
श्रीमान जी, वर्तमान सरकार और विपक्ष के साथ ही सारे देश के आम आदमियों की निगाह आपकी तरफ है कि आप अपनी पार्टी के लिए कैसे-कैसे उम्मीदवारों का चयन करते हैं. यदि आप मात्र सत्ता पर कब्जा जमाने की अति महत्वकांक्षा चलते "हंस" (अच्छे उम्मीदवार) नहीं चुन पाएँ तो काफी लोगों की आपसे उम्मीदें टूट जायेंगी और यदि आप बिना सत्ता की भूख रखकर चुनाव मैदान में अच्छे उम्मीदवार(हंस) उतारने का उद्देश्य पूरा कर पाएँ तो आप एक अच्छे जौहरी बनकर अपना थाल मोतियों से भरा पायेंगे और आपके साथ जो आम आदमी सच में व्यवस्था बदलने के इच्छुक है, वो आपके साथ जुड जायेंगे. फ़िलहाल वो आपकी पार्टी की कार्यशैली पर अपनी गिध्द दृष्टि जमाए हुए है और देखना चाहते हैं कि आपकी कथनी और करनी में कहीं कोई अंतर तो नहीं आ रहा है. इसलिए आपको उम्मीदवार(हंस) चयन प्रक्रिया में अधिक से अधिक पारदर्शिता का उदाहरण पेश करते हुए एक-एक कदम फूंक-फूंककर रखना होगा. आपका उठाया एक गलत कदम देश के भविष्य को अंधकार में डूबा देगा.
श्री अरविन्द केजरीवाल जी, श्री अन्ना हजारे जी द्वारा किये प्रथम आंदोलन अप्रैल 2011 से आपको देश का बच्चा-बच्चा जानने लगा है. तब से काफी लोग मुझे उत्तम नगर का अरविन्द केजरीवाल कहते हैं और कहने को तो कुछ लोग "गरीबों का मसीहा" भी कहते हैं, क्योंकि पिछले 18 साल से अपनी पत्रकारिता के माध्यम से "आम आदमी" की आवाज को एक बुलंद आवाज देने का प्रयास करता आ रहा हूँ और आज तक जो कोई मेरे दरवाजे पर किसी भी प्रकार की मदद के लिए आया है. वो खाली हाथ या निराश नहीं लौटा है. यहाँ एक बात यह भी है कि मैंने कभी किसी की धन से मदद नहीं की है, बस अपनी कलम से और सही जानकारी देकर उसको जागरूक करके उसे उसकी समस्या का समाधान पाने की प्रक्रिया समझाई है और हाँ,  इसके अलावा ना मैं गरीबों का मसीहा हूँ और ना उत्तम नगर का अरविन्द केजरीवाल हूँ, क्योंकि हर व्यक्ति को अपने-अपने कर्मों द्वारा उसके शरीर को एक पहचान मिलती है.  मैं अपनी पूर्व की "सिरफिरा" और वर्तमान की "निर्भीक"  पहचान से ही संतुष्ट हूँ. आपको सनद होगा कि जो आप कर सकते हैं, वो मैं नहीं कर सकता हूँ और जो मैं कर सकता हूँ, वो आप नहीं कर सकते हैं. इसी प्रकार हर व्यक्ति को भगवान ने अपने-अपने कर्म करने के लिए हमारी- आपकी  "आत्मा" को मिटटी शरीर में समावेश करके भेजा है.  इसलिए कहाँ आप और कहाँ मैं यानि कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली.  मैं अपने आपको एक तुच्छ-सा जीव मानता हूँ. जिसे उस परम पिता परमेश्वर ने धरती पर जन्म लेकर नेक कार्य करने का आदेश दिया है. मैं उसी आदेश का पालन करता हूँ. मैंने कोई स्कूली/कालेज की ज्यादा किताबें नहीं पढ़ी है मगर "इंसानियत" (मानवता) नामक पाठ पढ़ा है और उसके अनुसार कार्य करने की कोशिश करता हूँ. 
यदि आप और आपकी पार्टी सचमुच में भारत देश को उन्नति व खुशहाली की ओर ले जाना चाहते हैं और आप अपनी पार्टी के संविधान के लिए बहुत अधिक कठोर और ठोस निर्णय ले सकते हैं.  तब मैं आपकी दिल्ली विधानसभा 2013 और लोकसभा 2014 के लिए ऐसा घोषणा पत्र तैयार करवा सकता हूँ.  जो पूरे भारत वर्ष की सभी राजनीतिक पार्टियों से अलग और निराला होगा. लेकिन इसके लिए बहुत ही त्यागी, तपस्वी और योगी उम्मीदवारों की जरूरत होगी और उनको तलाशने के लिए काफी प्रयास करने होंगे. हमारे भारत वर्ष में ऐसे व्यक्तियों को खोजना असंभव नहीं है. हमारे भारत देश में एक से एक बढकर त्यागी, बलिदानी और तपस्वी पैदा हुए है और आज भी है. ऐसा भारत देश का इतिहास गवाही दे रहा है.  बस इसके लिए आपके पास दृढ़ निश्चय होने के साथ वो जोश, वो जुनून होना चाहिए. मेरी इस बात को "सच" में बदलने के लिए आपको अपना कुछ कीमती समय मुझे देना होगा. उपरोक्त पत्र के माध्यम से अपने विचारों की अभिव्यक्ति करते हुए अपनी विचारधारा आप तक पहुँचाना ही मेरा "जीवन का लक्ष्य" है. अपने क्रांतिकारी विचारों और अपनी ईमानदारी से चलाई लेखनी से आपको या आपकी पार्टी को नीचा दिखाना या अपमान करना मेरा उद्देश्य नहीं है.  मेरे विचारों के भावों को अपने विवेकानुसार अच्छी तरह से समझने का प्रयास करें.  

पूरी पोस्ट नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके पढ़ें. मेरा विचार है कि आपको मेरे विचारों को जानने का अवसर मिलेगा, कुछ हिंदी के मुहावरे और कहावतें आदि के बारे में मालूम होने के साथ ही देश की राजनीति में क्यों "अच्छे व्यक्तियों" की आवश्यकता है. इसका भी पता चलेगा. 

1.9.12

गुड खाना और गुलगुलों से परहेज करना

जब जब भारत देश में हिंदी दिवस आता है तब एक दिन के लिए कलाकार (अभिनेता / अभिनेत्री), पत्रकार, कवि और साहित्यकार हिंदी का गुणगान करते नजर आते हैं और अपनी टिप्पणी/विचारों को ऐसे व्यक्त करते हैं. जैसे उन से ज्यादा बड़ा तो कोई हिंदी प्रेमी इस भारत वर्ष में कोई हैं ही नहीं. उसके बाद 364 दिन हिंदी को अपनी दुश्मन के समान समझते हैं. हिंदी के बड़े-बड़े कलाकार (अभिनेता / अभिनेत्री), पत्रकार, कवि और साहित्यकार आदि अपने नाम को सोशल वेबसाईट (फेसबुक,गूगल,ट्विट्टर आदि) पर (अपनी प्रोफाइल में) हिंदी में लिखना तक पसंद नहीं करते हैं, क्योंकि कहीं लोग उनको "अनपढ़ और गंवार" ना समझे.
काश ! हमारे देश के सभी बुद्धिजीवी भी हिंदी के प्रति पूरे ईमानदार होकर ज्यादा से ज्यादा हिंदी का प्रयोग करते हुए अपनी सभी बातें/विचार/रचना हिंदी में फेसबुक/टिवटर आदि पर डाले. तब कुछ हिंदी की स्थिति में सुधार संभव है. आज हिंदी की इतनी बुरी स्थिति हिंदी के चाहने वालों की वजह से है. कई तो कहते हैं कि हम हिंदी से अपनी माँ जितना प्यार करते है.मगर फेसबुक/टिवटर आदि पर अपने विचार/बातें/रचनाएँ अंग्रेजी या रोमन लिपि में डालते हैं यानि गुड खाते हैं और गुलगुलों से परहेज करते हैं. 

 मैंने कई अवसरों पर देखा है कि कई कलाकार (अभिनेता / अभिनेत्री), पत्रकार, कवि और साहित्यकार आदि कमाई तो हिंदी की खाते हैं और जब सोशल वेबसाइट पर अपना स्टेटस (गरिमा) दिखाने के लिए हिंदी से मुँह छुपाते नजर आते हैं. इसमें एक आध अपवाद छोड़ दें, क्योंकि कई लोगों फेसबुक आदि पर हिंदी लिखने से संबंधित जानकारी नहीं होती है. वरना.....अधिकांश के पास समय ही नहीं होता है, क्योंकि हिंदी लिखने के लिए थोड़ी ज्यादा मेहनत और समय की जरूरत है.
फेसबुक  प्रयोगकर्त्ताओं के लिए जानकारी:-
प्रश्न:-मुझे देवनागरी में नाम लिखने से सर्च करने में परेशानी होती है....इसलिए मैंने रोमन में लिखा हुआ है.....जो भी नाम देवनागरी में लिखे हैं, वो सर्च करने पर नहीं मिलते हैं.  
उत्तर:-अपनी प्रोफाइल में हिंदी में नाम कैसे लिखें:-आप सबसे पहले "खाता सेट्टिंग " में जाए. फिर आप "नेम एडिट" को क्लिक करें. वहाँ पर प्रथम,मिडिल व लास्ट नाम हिंदी में भरें और डिस्प्ले नाम के स्थान पर अपना पूरा नाम हिंदी में भरें. उसके बाद नीचे दिए विकल्प वाले स्थान में आप अपना नाम अंग्रेजी में भरने के बाद ओके कर दें. अब आपको कोई भी सर्च के माध्यम से तलाश भी कर सकता है और आपका नाम हर संदेश और टिप्पणी पर देवनागरी हिंदी में भी दिखाई देगा. अब बाकी आपकी मर्जी. हिंदी से प्यार करो या बहाना बनाओ.

पूरा लेख यहाँ  सिरफिरा-आजाद पंछी: गुड खाना और गुलगुलों से परहेज करना पर क्लिक करके पढ़ें.

28.8.12

हज यात्रियों को मिलेगा सउदी का सिमकार्ड

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इस साल हज पर जाने वाले भारतीय नागरिकों को पहली बार सउदी टेलीकॉम की ओर से सिमकार्ड बेहद किफायती  दर पर मुहैया कराया जाएगा। जेददा में भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने एक बयान में कहा कि इस सिमकार्ड के जरिए कॉल करने की दर पांच रियाल होगी, जबकि इनकमिंग मुफ्त होगी। इस सिमकार्ड में पहले से ही सभी संबंधित अधिकारियों और कुछ दूसरे महत्वपूर्ण नंबर भी होंगे। बयान में कहा गया है कि ये सिमकार्ड भारत में ही विभिन्न स्थानों पर दिए जाएंगे ताकि हज यात्रियों के परिवार के लोग ये नंबर पहले से ही जान सकें। महावाणिज्य दूतावास ने कहा कि भारतीय हज यात्रियों को पूरी सुविधा मुहैया कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। 
सौरसे : http://www.livehindustan.com/news/videsh/international/article1-Haj-Saudi-SIM-Cards-Indian-Haj-pilgrims-2-2-256582.html


4.8.12

जब प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज न हो

आज हाई प्रोफाइल मामलों को छोड़ दें तो किसी अपराध की प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करा लेना ही एक "जंग" जीत लेने के बराबर है. आज के सम.......पूरा लेख यहाँ रमेश कुमार सिरफिरा: जब प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज न हो पर क्लिक करके पढ़ें.

28.7.12

रात भर...


करके वादा कोई सो गया चैन से 
करवटें बदलते रहे हम रात भर !!१!!
हसरतें दिल में घुट-घुट के मरती रही 
और जनाज़े निकलते रहे रात भर !!२!!
रात भर चांदनी से लिपटे रहे वो 
हम अपने हाथ मलते रहे रात भर !!३!!
आबरू क्या बचाते वह गुलशन कि 
खुद कलियाँ मसलते रहे रात भर !!४!!
हमको पीने को एक कतरा भी न मिला 
और दौर पर दौर चलते रहे रात भर !!५!!
रौशनी हमें दे ना पाए यह चिराग अब 
यूँ तो कहने को वो जलते रहे रात भर !!६!!
छत में लेट टटोले हमने आसमान 
अश्क इन आँखों से ढलते रहे रात भर !!७!!
.........नीलकमल वैष्णव "अनिश".........

20.7.12

हमें अपने चरित्र का निर्माण करना चाहिए

दोस्तों, काफी समय पहले मेरा लिखा एक लेख " हमें अपने चरित्र का निर्माण करना चाहिए" जो कई पत्रिकाओं में प्रकाशित हुआ था. यह लेख ही नहीं मेरे ...पूरा लेख यहाँ सच्चा दोस्त: हमें अपने चरित्र का निर्माण करना चाहिए: पर क्लिक करके पढ़ें.

16.7.12

क्या आज महिलाएं खुद मार खाना चाहती हैं ?

सच का सामना: क्या आज महिलाएं खुद मार खाना चाहती हैं ?:  भारत देश में ऐसा राष्टपति होना चाहिए जो देश के आम आदमी की बात सुने और भोग-विलास की वस्तुओं का त्याग करने की क्षमता रखता हो. ऐसा ना हो ...

क्या महिलाओं को पीटना मर्दानगी की निशानी है ?

सच का सामना: क्या महिलाओं को पीटना मर्दानगी की निशानी है ?: आज वैसे तो 99.98% लोगों का मीडिया और ऑफ कैमरा के सामने कहना है कि अपनी पत्नी को पीटते रहना चाहिए नहीं तो सिर पर सवार हो जाती है. उन्हें...

9.7.12

लड़ो और आखिरी दम तक लड़ों

दोस्तों ! आखिरकार टीम अन्ना को जंतर-मंतर पर अनशन करने की अनुमति मिल गई है। मिली जानकारी के मुताबिक, शनिवार को टीम अन्ना को 25 जुलाई से 8 अगस्त तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन करने के लिए दिल्ली पुलिस की इजाजत मिल गई है । गौरतलब है कि दो दिन पहले दिल्ली पुलिस ने मानसून सेशन के हवाला देते हुए टीम अन्ना को अनुमति देने से मना कर दिया था। टीम अन्ना के अहम अरविंद केजरीवाल के अनुसार दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से शनिवार को मुलाकात के बाद यह परमिशन दी गई है। वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि कुछ शर्तों के साथ टीम अन्ना को यह अनुमति दी गई है । 
दोस्तों ! आप यह मत सोचो कि- देश ने हमारे लिए क्या किया है, बल्कि यह सोचो हमने देश के लिए क्या किया है ? इस बार आप यह सोचकर "आर-पार" की लड़ाई के लिए श्री अन्ना हजारे जी के अनशन में शामिल (अपनी-अपनी योग्यता और सुविधानुसार) हो. वरना वो दिन दूर नहीं. जब हम और हमारी पीढियां कीड़े-मकोड़ों की तरह से रेंग-रेंगकर मरेगी. आज हमारे देश को भ्रष्टाचार ने खोखला कर दिया है. माना आज हम बहुत कमजोर है, लेकिन "एकजुट" होकर लड़ो तब कोई हम सबसे ज्यादा ताकतवर नहीं है. 
 इतिहास गवाह रहा कि जब जब जनता ने एकजुट होकर अपने अधिकारों को लेने के लिए लड़ाई (मांग) की है, तब तब उसको सफलता मिली है. लड़ो और आखिरी दम तक लड़ों. यह मेरी-तुम्हारी लड़ाई नहीं है. हम सब की लड़ाई है. मौत आज भी आनी है और मौत कल भी आनी है. मौत से मत डरो. मौत एक सच्चाई है. इसको दिल से स्वीकार करो.  
 पूरा आलेख यहाँ सिरफिरा-आजाद पंछी: लड़ो और आखिरी दम तक लड़ों क्लिक करके पढ़ें.
अगर हम अपना-अपना राग और अपनी अपनी डपली बजाते रहे तो हमें कभी कोई भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून नहीं मिलेगा. अब यह तुम्हारे ऊपर है कि गीदड़ की मौत मरना चाहते हो या शेर की मौत मरना चाहते हो. सब जोर से कहो कि- खुद मिटा देंगे लेकिन "जन लोकपाल बिल" लेकर रहेंगे. जो हमें जन लोकपाल बिल नहीं देगा तब हम यहाँ(ससंद) रहने नहीं देंगे. 
निम्नलिखित समाचार भी पढ़ें भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे की लड़ाई

21.4.12

कन्या-भ्रूण

मत रोको माँ!
मुझे मिट जाने दो
ताकि
इस अग्निपरीक्षा से
गुजरना न पड़े मुझको,

मिट ही जाने दो
इस अबोली/ अदेखी को
ताकि
बार बार मिटने का दुःख
बाकी न रह जाए
तुम्हारी तरह!

मत रोको माँ!

अपनी कोख की तरफ बढ़ते
इन हत्यारे हाथों को,

अलबत्ता रोक लो
ये आंसू...
ये छटपटाहट
क्योकि-
इनमे तुम मुझे छिपा नहीं पाओगी
मैं
अपूर्ण ही सही पहचान ली गयी हूँ!!

4.4.12

बोल्डनेस छोड़िए हो जाइए कूल...खुशदीप​ के सन्दर्भ में


ख़ुशदीप सहगल किसी ब्लॉग पर अपनी मां का काल्पनिक नंगा फ़ोटो देखें तो उन्हें दुख होगा इसमें ज़रा भी शक नहीं है लेकिन उनकी मां का नंगा फ़ोटो ब्लॉग पर लगा हुआ है और उन्हें दुख का कोई अहसास ही नहीं है।
...और यह फ़ोटो उनके ही ब्लॉग पर है और ख़ुद उन्होंने ही लगाया है।
उन्होंने चुटकुलों भरी एक पोस्ट तैयार की। जिसका शीर्षक है ‘बोल्डनेस छोड़िए और हो जाइये कूल‘
इस पोस्ट का पहला चुटकुला ही हज़रत आदम अलैहिस्सलाम और अम्मा हव्वा अलैहिस्सलाम पर है। इस लिहाज़ से उन्होंने एक फ़ोटो भी उनका ही लगा दिया है। फ़ोटो में उन्हें नंगा दिखाया गया है।
दुनिया की तीन बड़ी क़ौमें यहूदी, ईसाई और मुसलमान आदम और हव्वा को मानव जाति का आदि पिता और आदि माता मानते हैं और उन्हें सम्मान देते हैं। ये तीनों मिलकर आधी दुनिया की आबादी के बराबर हैं। अरबों लोग जिनका सम्मान करते हैं, उनके नंगे फ़ोटो लगाकर ब्लॉग पर हा  हा ही ही की जा रही है।
यह कैसी बेहिसी है भाई साहब ?
आदम हव्वा का फ़ोटो इसलिए लगा दिया कि ये हमारे कुछ थोड़े ही लगते हैं, ये अब्राहमिक रिलीजन वालों के मां बाप लगते हैं।

अरे भाई ! आप किस की संतान हो ?
कहेंगे कि हम तो मनु की संतान हैं।
और पूछा जाए कि मनु कौन हैं, तो ...?
कुछ पता नहीं है कि मनु कौन हैं !

अथर्ववेद 11,8 बताता है कि मनु कौन हैं ?
इस सूक्त के रचनाकार ऋषि कोरूपथिः हैं -
यन्मन्युर्जायामावहत संकल्पस्य गृहादधिन।
क आसं जन्याः क वराः क उ ज्येष्ठवरोऽभवत्। 1 ।
तप चैवास्तां कर्भ चतर्महत्यर्णवे।
त आसं जन्यास्ते वरा ब्रह्म ज्येष्ठवरोऽभवत् । 2 ।

अर्थात मन्यु ने जाया को संकल्प के घर से विवाहा। उससे पहले सृष्टि न होने से वर पक्ष कौन हुआ और कन्या पक्ष कौन हुआ ? कन्या के चरण कराने वाले बराती कौन थे और उद्वाहक कौन था ? ।1। तप और कर्म ही वर पक्ष और कन्या पक्ष वाले थे, यही बराती थे और उद्वाहक स्वयं ब्रह्म था।2। 

यहां स्वयंभू मनु के विवाह को सृष्टि का सबसे पहला विवाह बताया गया है और उनकी पत्नी को जाया और आद्या कहा गया है। ‘आद्या‘ का अर्थ ही पहली होता है और ‘आद्य‘ का अर्थ होता है पहला। ‘आद्य‘ धातु से ही ‘आदिम्‘ शब्द बना जो कि अरबी और हिब्रू भाषा में जाकर ‘आदम‘ हो गया।
स्वयंभू मनु का ही एक नाम आदम है। अब यह बिल्कुल स्पष्ट है। अब इसमें किसी को कोई शक न होना चाहिए कि मनु और जाया को ही आदम और हव्वा कहा जाता है और सारी मानव जाति के माता पिता यही हैं।
ख़ुशदीप सहगल के माता पिता भी यही हैं।
अपने मां बाप के नंगे फ़ोटो ब्लॉग पर लगाकर सहगल साहब ख़ुश हो रहे हैं कि देखो मैंने कितनी अच्छी पोस्ट लिखी है।
अपनी मां की नंगी फ़ोटो लगा नहीं सकते और जो उनकी मां की भी मां है और सबकी मां है उसका नंगा फ़ोटो लगाकर बैठ गए हैं और किसी ने उन्हें टोका तक नहीं ?
ये है हिंदी ब्लॉग जगत !
कहते हैं कि हम पढ़े लिखे और सभ्य हैं।
हम इंसान के जज़्बात को आदर देते हैं।
अपने मां बाप आदम और हव्वा अलैहिस्सलाम पर मनघड़न्त चुटकुले बनाना और उनका काल्पनिक व नंगा फ़ोटो लगाना क्या उन सबकी इंसानियत पर ही सवालिया निशान नहीं लगा रहा है जो कि यह सब देख रहे हैं और फिर भी मुस्कुरा रहे हैं ?


  •  

    सम्पूर्ण मानव जाति की माँ का नंगा चित्र प्रकाशित करना कितना उचित है ?
    रात हमने 'ब्लॉग की ख़बरें' पर पोस्ट पब्लिश करने के साथ ही उनकी पोस्ट पर टिप्पणी भी की और इस पोस्ट की सूचना देने के लिए अपना लिंक भी छोड़ा लेकिन उन्होंने गलती को मिटने के बजाय हमारी टिप्पणी ही मिटा डाली.
    उनकी गलती दिलबाग जी ने भी दोहरा डाली. उनकी पोस्ट से फोटो लेकर उन्होंने भी चर्चा मंच की पोस्ट   (चर्चा - 840 ) में लगा दिया है.
    एक टिप्पणी हमने चर्चा मंच की पोस्ट पर भी कर दी है.
    यह मुद्दा तो सबके माता पिता की इज्ज़त से जुडा है. सभी को इसपर अपना ऐतराज़ दर्ज कराना चाहिए.
    http://blogkikhabren.blogspot.in/2012/04/manu-means-adam.html

    31.3.12

    अपने ही दस बच्चों की मां को दुल्हन बनाकर लाया

    बारात लेकर गया और अपने ही दस बच्चों की मां को दुल्हन बनाकर लाया रामौतार Dulha Dulhan 

    by



  • DR. ANWER JAMAL




  • हरदोई/एजेंसी ! बेटी के हाथ पीले करने की खातिर किसी बाप को अगर पहले अपने हाथ पीले करने पडे़ तो यह सुनने में ही अजीब लगेगा...
    Read More...



    शरीयत, तरीक़त, मारिफ़त, हक़ीक़त Sufi & Tasawwuf

     


    पीर उस सालिक को साधना के मार्ग पर बढ़ने का रास्ता दिखाते हैं। सूफ़ी गुरुओं ने साधकों को साधना के लिए ये चार सोपान निर्धारित किए हैं –

    टेलीपैथी सिखाने वाला हिन्दी ब्लॉग

     


    टेलीपैथी सिखाने वाला एक नया ब्लॉग अब हिन्दी में Easy Telepathy RELAXATION EXERCISE BY WILLIAM HEWITT

    30.3.12

    जहां तुम हो, वहीं तुम्हारी रूह है और तुम्हारा रब भी वहीं है

    सच्चे बादशाह से बातें कीजिए God hears.

    रूह में रब का नाम नक्श है।
    रूह सबकी एक ही है।
    जो भी पैदा होता है, उसी एक रूह का नूर लेकर पैदा होता है।
    रूह क्या है ?
    रब की सिफ़ाते कामिला का अक्स (सुंदर गुणों का प्रतिबिंब) है।
    सिफ़ाते कामिला को ज़ाहिर करने वाले बहुत से नाम हैं।
    रब का हरेक नाम रूह को ताक़त देता है। रब का नाम रूहानी ताक़त का ख़ज़ाना है।
    रब का नाम दिल का सुकून है।
    खड़े बैठे या लेटे कैसे भी उसका नाम लो, दिल को सुकून मिलता है।
    जहां तुम हो, वहीं तुम्हारी रूह है और तुम्हारा रब भी वहीं है।
    रब की मौजूदगी को महसूस कीजिए।
    अपने अहसास को थोड़ा थोड़ा करके गहरा करते जाइये।
    अपने रब से बातें कीजिए, उसके साथ हंसिए बोलिए।
    उसके साथ अपने सुख दुख शेयर कीजिए, जैसे कि आप अपने मां बाप और दोस्त से शेयर करते हैं।
    आप जो भी कहते हैं, वह उसे सुनता है।
    यक़ीन कीजिए, आपको उससे बातें करके अच्छा लगेगा।
    वह आपकी बातों का आपको जवाब भी देगा।
    वह आपकी बातों का जवाब बहुत तरह से देता है, आज भी दे रहा है लेकिन आपका ध्यान उसकी तरफ़ नहीं है इसलिए आप यह जान ही नहीं पाते कि उसने आपकी किस बात पर किस तरह रिएक्ट किया है ?
    आप जो कुछ सुनते हैं, उसे रब से जोड़कर सुनिए, उनमें आपको जवाब मिलेगा।
    जो कुछ आप देखते हैं, उसे रब से जोड़कर देखिए, वे चीज़ें आपको रब की तरफ़ से संकेत देंगी।
    जिन धार्मिक ग्रंथों को आप पढ़ते हैं, उन पर ध्यान दीजिए, आपको वहां अपनी बात का जवाब मिलेगा।
    जैसे जैसे आपकी प्रैक्टिस बढ़ती जाएगी, आप ख़ुदा के इशारों को बेहतर तरीक़े से समझने लगेंगे।
    रब से बात करेंगे तो आपको वह हमेशा अपने साथ ही महसूस होगा।
    इससे आपके टेंशन्स दूर होंगे, आपको सुकून मिलेगा।
    आप जिस रब से बात कर रहे हैं, वह इस कायनात का बादशाह है और बादशाह से बात करना अपने आप में ही एक गौरव की बात है।
    कायनात का बादशाह आपको हमेशा अवेलेबल है।
    बादशाह अपना हो तो फिर चिंता किस बात की है ?
    बस हम बादशाह के हो जाएं।

    29.3.12

    भारत की स्वतंत्रता के बाद राजस्थान का एकीकरण (३० मार्च राजस्थान दिवस है )

    राजस्थान के इतिहास की समय रेखा है।

    ५००० ई. पू.: कालीवंग सभ्यता
    ३५०० ई. पू.;आहड़ सभ्यता
    १००० ई.पू.-६०० ई. पू. आर्य सभ्यता
    ३०० ई. पू.-६०० ई.जनपद युग

  • ३५० - ६०० गुप्त वंश का हस्तक्षेप


  • ६वीं शताब्दी व ७वीं शताब्दी हूणों के आक्रमण, हूणों व गुर्जरों द्वारा राज्यों की स्थापना - हर्षवर्धन का हस्तक्षेप


  • ७२८ बाप्पा रावल द्वारा चितौड़ में मेवाड़ राज्य की स्थापना


  • ९६७ कछवाहा वंश घोलाराय द्वारा आमेर राज्य की स्थापना


  • १०१८ महमूद गजनवी द्वारा प्रतिहार राज्य पर आक्रमण तथा विजय


  • १०३१ दिलवाड़ा में विंमल शाह द्वारा आदिनाथ मंदिर का निर्माण


  • १११३ अजयराज द्वारा अजमेर (अजयमेरु) की स्थापना


  • ११३७ कछवाहा वंश के दुलहराय द्वारा ढूँढ़ार राज्य की स्थापना


  • ११५६ महारावल जैसलसिंह द्वारा जैसलमेर की स्थापना


  • ११९१ मुहम्मद गोरी व पृथ्वीराज चौहान के मध्य तराइन का प्रथम युद्ध - मुहम्मद गोरी की पराजय


  • ११९२ मुहम्मद गोरी व पृथ्वीराज चौहान के मध्य तराइन का द्वितीय युद्ध -- पृथ्वीराज की पराजय


  • ११९५ मुहम्मद गौरी द्वारा बयाना पर आक्रमण


  • १२१३ मेवाड़ के सिंहासन पर जैत्रसिहं का बैठना


  • १२३० दिलवाड़ में तेजपाल व वस्तुपाल द्वारा नेमिनाथ मंदिर का निर्माण


  • १२३४ रावल जैत्रसिंह द्वारा इल्तुतमिश पर विजय


  • १२३७ रावल जैत्रसिंह द्वारा सुल्तान बलवन पर विजय


  • १२४२ बूँदी राज्य की हाड़ा राज देशराज द्वारा स्थापना


  • १२९० हम्मीर द्वारा जलालुद्दीन का आक्रमण विफल करना


  • १३०१ हम्मीर द्वारा अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण को विफल करना, षड़यन्त्र द्वारा पराजित रणथम्मौर के किले पर ११ जुलाई को तुर्की का आधिकार स्थापित


  • १३०२ रत्नसिंह गुहिलों के सिहासन पर आरुढ़


  • १३०३ अलाउद्दीन खिलजी द्वारा राणा रत्नसिंह पराजित, पद्मिनी का जौहर, चितौड़ पर खिलजी का अधिकार, चितौड़ का नाम बदलकर खिज्राबाद


  • १३०८ कान्हडदेव चौहान खिलजी से पराजित, जालौर का खिलजी पर अधिकार


  • १३२६ राणा हमीर द्वारा चितौड़ पर पुन: अधिकार


  • १४३३ कुम्भा मेवाड़ के सिंहासन पर आरुढ़


  • १४४० महाराणा कुम्भा द्वारा चितौड़ में विजय स्तम्भ का निर्माण


  • १४५६ महाराणा कुम्मा द्वारा मालवा के शासन महमूद खिलजी को परास्त करना, कुम्भा का शम्स खाँ को हराकर नागौर पर कब्जा


  • १४५७ गुजरात व मालवा का मेवाड़ के विरुद्ध संयुक्त अभियान करना


  • १४५९ राव जोधा द्वारा जोधपुर की स्थापना


  • १४६५ राव बीका द्वारा बीकानेर राज्य की स्थापना


  • १४८८ बीकानेर नगर का निर्माण पूर्ण


  • १५०९ राणा संग्रामसिंह मेवाड़ के शासक बने


  • १५१८ महाराणा जगमल सिंह द्वारा बाँसवाड़ राज्य की स्थापना


  • १५२७ राणा संग्राम सिंह का बयाना पर अधिकार तथा बाबर के हाथों पराजय


  • १५२८ राणा सांगा का निधन


  • १५३२ राजा मालदेव द्वारा अपने पिता राव गंगा की हत्या पर मारवाड़ की सत्ता पर कब्जा


  • १५३८ मालदेव का सिवाना व जालौर पर अधिपत्य


  • १५४१ राजा मालदेव द्वारा हुमायू को निमंत्रण देना


  • १५४२ राजा मालदेव का बीकानेर नरेश जैत्रसिंह को परास्त करना, जैत्रसिंह की मृत्यु, हुमायूँ का मारवाड़ सीमा मे प्रवेश


  • १५४४ राजा मालदेव व शेरशह के मध्य जैतारण (सामेल) का युद्ध, मालदेव की पराजय


  • १५४७ भारमल आमेर का शासक बना


  • १५५९ राजा उदयसिंह द्वारा उदयपुर नगर की स्थापना


  • १५६२ राजा मालदेव का निधन, मालदेव का तृतीय पुत्र राव चन्द्रसेन मारवाड़ के सिंहासन पर आरुढ


  • १५६२ आमेर के राजा भारमल ने अपनी पुत्री का विवाह सांभर से सम्पन्न कराया


  • १५६४ राव चन्द्रसेन की पराजय, जोधपुर मुगलों के अधीन


  • १५६९ रणथम्भौर नरेश सुर्जन हाडा की राजा मानसिंह से सन्धि, हाड़ पराजित


  • १५७२ राणा उदयसिंह की मृत्यु, महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक


  • १५७२ अकबर द्वारा रामसिंह को जोधपुर का शासक नियुक्त


  • १५७३ राजा मानसिंह की महाराणा प्रताप से मुलाकात


  • १५७४ बीकानेर नरेश कल्याणमल का निधन, रायसिंह का सिंहासनरुढ़ होना।


  • १५७६ हल्दीघाटी का युद्ध, महाराणा प्रताप की सेना मुगल सेना से पराजित


  • १५७८ मुगल सेना द्वारा कुम्भलगढ़ पर अधिकार, प्रताप का छप्पन की पहाड़ियों में प्रवेश। चावड़ को राजधानी बनाना


  • १५८० अकबर के दरबार के नवरत्नों में एक अब्दुल रहीम खानखाना को अकबर द्वारा राजस्थान का सूबेदार नियुक्त करना।




  • १५८९ आमेर के राजा भारमल की मृत्यु, मानसिंह को सिंहासन मिला


  • १५९६ राजा किशन सिंह द्वारा किशनगढ़ (अजमेर) की नीवं


  • १५९७ महाराणा प्रताप की चांवड में मृत्यु


  • १६०५ सम्राट अकबर ने राजा मानसिंह को ७००० मनसव प्रदान किये।


  • १६१४ राजा मानसिंह की दक्षिण भारत में मृत्यु


  • १६१५ राणा अमरसिंह द्वारा मुगलों से सन्धि


  • १६२१ राजा मिर्जा जयसिंह आमेर का शासक नियुक्त


  • १६२५ माधोसिंह द्वारा कोटा राज्य की स्थापना


  • १६६० राजा राजसिंह द्वारा राजसमन्द का निर्माण प्रारम्भ


  • १६६७ जयसिंह की दक्षिण भारत में मृत्यु


  • १६९१ राजा राजसिंह द्वारा नाथद्वारा मंदिर का निर्माण


  • १७२७ सवाई जयसिंह द्वारा जयपुर नगर का स्थापना


  • १७३३ जयपुर नरेश सवाई जयसिंह का मराठों से पराजित होना


  • १७७१ कछवाहा वंश के राव प्रतापसिंह ने अलवा राज्य की नींव डाली


  • १८१८ झाला वंशजों द्वारा झालावाड़ राज्य की स्थापना


  • १८१८ मेवाड़ के राजपूतों द्वारा ईस्ट इंडिया कम्पनी से संधि


  • १८३८ माधव सिंह द्वारा झालावाड़ की स्थापना
    २८ मई को नसीरा बाद में सैनिक विद्रोह
    राजकीय महाविद्यालय, अजमेर के छात्रों द्वारा कांग्रेस कमिटी का गठन
    लार्ड कर्जन ने एडवर्ड - सप्तम के राज्यारोहण समारोह में उदयपुर के महाराणा फतेहसिंह को आमंत्रण और महाराणा द्वारा दिल्ली प्रस्थान
    बिजोलिया किसान आन्दोलन
    भील आन्दोलन प्रारम्भ
    मेवाड़, अलवर, भरतपुर, प्रजामंडल गठित, सुभाषचन्द्र बोस की जोधपुर यात्रा
    ३१ दिसम्बर को अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद के अन्तर्गत राजपूताना प्रान्तीय सभा का गठन
    २७ जून को रियासती विभाग की स्थापना
    शाहपुरा में गोकुल लाल असावा के नेतृत्व में लोकप्रिय सरकार बनी जो १९४८ में संयुक्त राजस्थान संघ में विलीन हो गई

  • 27.3.12

    भारत की स्वतंत्रता के बाद राजस्थान का एकीकरण (३० मार्च राजस्थान दिवस है )


    भारत की स्वतंत्रता के बाद राजस्थान का एकीकरण

    राजस्थान भारत का एक महत्वपूर्ण प्रांत है। यह 30 मार्च 1949 को भारत का एक ऐसा प्रांत बना, जिसमें तत्कालीन राजपूताना की ताकतवर रियासतें विलीन हुईं । भरतपुर के जाट शासक ने भी अपनी रियासत के विलय राजस्थान में किया था। राजस्थान शब्द का अर्थ है: 'राजाओं का स्थान' क्योंकि यहां गुर्जर, राजपूत, मौर्य, जाट आदि ने पहले राज किया था। भारत के संवैधानिक-इतिहास में राजस्थान का निर्माण एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी । ब्रिटिश शासकों द्वारा भारत को आजाद करने की घोषणा करने के बाद जब सत्ता-हस्तांतरण की कार्यवाही शुरू की, तभी लग गया था कि आजाद भारत का राजस्थान प्रांत बनना और राजपूताना के तत्कालीन हिस्से का भारत में विलय एक दूभर कार्य साबित हो सकता है। आजादी की घोषणा के साथ ही राजपूताना के देशी रियासतों के मुखियाओं में स्वतंत्र राज्य में भी अपनी सत्ता बरकरार रखने की होड़ सी मच गयी थी, उस समय वर्तमान राजस्थान की भौगालिक स्थिति के नजरिये से देखें तो राजपूताना के इस भूभाग में कुल बाईस देशी रियासतें थी। इनमें एक रियासत अजमेर मेरवाडा प्रांत को छोड़ कर शेष देशी रियासतों पर देशी राजा महाराजाओं का ही राज था। अजमेर-मेरवाडा प्रांत पर ब्रिटिश शासकों का कब्जा था; इस कारण यह तो सीघे ही स्वतंत्र भारत में आ जाती, मगर शेष इक्कीस रियासतों का विलय होना यानि एकीकरण कर 'राजस्थान' नामक प्रांत बनाया जाना था। सत्ता की होड़ के चलते यह बडा ही दूभर लग रहा था क्योंकि इन देशी रियासतों के शासक अपनी रियासतों के स्वतंत्र भारत में विलय को दूसरी प्राथमिकता के रूप में देख रहे थे। उनकी मांग थी कि वे सालों से खुद अपने राज्यों का शासन चलाते आ रहे हैं, उन्हें इसका दीर्घकालीन अनुभव है, इस कारण उनकी रियासत को 'स्वतंत्र राज्य' का दर्जा दे दिया जाए । करीब एक दशक की ऊहापोह के बीच 18 मार्च 1948 को शुरू हुई राजस्थान के एकीकरण की प्रक्रिया कुल सात चरणों में एक नवंबर 1956 को पूरी हुई । इसमें भारत सरकार के तत्कालीन देशी रियासत और गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल और उनके सचिव वी. पी. मेनन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी । इनकी सूझबूझ से ही राजस्थान के वर्तमान स्वरुप का निर्माण हो सका।
    पहला चरण- 18 मार्च 1948
    सबसे पहले अलवर , भरतपुर, धौलपुर, व करौली नामक देशी रियासतों का विलय कर तत्कालीन भारत सरकार ने फरवरी 1948 मे अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर 'मत्स्य यूनियन' के नाम से पहला संघ बनाया। यह राजस्थान के निर्माण की दिशा में पहला कदम था। इनमें अलवर व भरतपुर पर आरोप था कि उनके शासक राष्टृविरोधी गतिविधियों में लिप्त थे। इस कारण सबसे पहले उनके राज करने के अधिकार छीन लिए गए व उनकी रियासत का कामकाज देखने के लिए प्रशासक नियुक्त कर दिया गया। इसी की वजह से राजस्थान के एकीकरण की दिशा में पहला संघ बन पाया । यदि प्रशासक न होते और राजकाज का काम पहले की तरह राजा ही देखते तो इनका विलय असंभव था क्योंकि इन राज्यों के राजा विलय का विरोध कर रहे थे। 18 मार्च 1948 को मत्स्य संघ का उद़घाटन हुआ और धौलपुर के तत्कालीन महाराजा उदयसिंह को इसका राजप्रमुख मनाया गया। इसकी राजधानी अलवर रखी गयी थी। मत्स्य संघ नामक इस नए राज्य का क्षेत्रफल करीब तीस हजार किलोमीटर था, जनसंख्या लगभग 19 लाख और सालाना-आय एक करोड 83 लाख रूपए थी। जब मत्स्य संघ बनाया गया तभी विलय-पत्र में लिख दिया गया कि बाद में इस संघ का 'राजस्थान' में विलय कर दिया जाएगा।
    दूसरा चरण 25 मार्च 1948
    राजस्थान के एकीकरण का दूसरा चरण पच्चीस मार्च 1948 को स्वतंत्र देशी रियासतों कोटा, बूंदी, झालावाड, टौंक, डूंगरपुर, बांसवाडा, प्रतापगढ , किशनगढ और शाहपुरा को मिलाकर बने राजस्थान संघ के बाद पूरा हुआ। राजस्थान संघ में विलय हुई रियासतों में कोटा बड़ी रियासत थी, इस कारण इसके तत्कालीन महाराजा महाराव भीमसिंह को राजप्रमुख बनाया गया। bundi के तत्कालीन महाराव बहादुर सिंह राजस्थान संघ के राजप्रमुख भीमसिंह के बडे भाई थे, इस कारण उन्हें यह बात अखरी कि छोटे भाई की 'राजप्रमुखता' में वे काम कर रहे है। इस ईर्ष्या की परिणति तीसरे चरण के रूप में सामने आयी।
    तीसरा चरण 18 अप्रैल 1948
    बूंदी के महाराव बहादुर सिंह नहीं चाहते थें कि उन्हें अपने छोटे भाई महाराव भीमसिंह की राजप्रमुखता में काम करना पडे, मगर बडे राज्य की वजह से भीमसिंह को राजप्रमुख बनाना तत्कालीन भारत सरकार की मजबूरी थी। जब बात नहीं बनी तो बूंदी के महाराव बहादुर सिंह ने उदयपुर रियासत को पटाया और राजस्थान संघ में विलय के लिए राजी कर लिया। इसके पीछे मंशा यह थी कि बडी रियासत होने के कारण उदयपुर के महाराणा को राजप्रमुख बनाया जाएगा और बूंदी के महाराव बहादुर सिंह अपने छोटे भाई महाराव भीम सिंह के अधीन रहने की मजबूरी से बच जाएगे और इतिहास के पन्नों में यह दर्ज होने से बच जाएगा कि छोटे भाई के राज में बडे भाई ने काम किया। अठारह अप्रेल 1948 को राजस्थान के एकीकरण के तीसरे चरण में उदयपुर रियासत का राजस्थान संघ में विलय हुआ और इसका नया नाम हुआ 'संयुक्त राजस्थान संघ'। माणिक्य लाल वर्मा के नेतृत्व में बने इसके मंत्रिमंडल में उदयपुर के महाराणा भूपाल सिंह को राजप्रमुख बनाया गया, कोटा के महाराव भीमसिंह को वरिष्ठ उपराजप्रमुख बनाया गया। और कुछ इस तरह बूंदी के महाराजा की चाल भी सफल हो गयी।
    चौथा चरण तीस मार्च 1949
    इससे पहले बने संयुक्त राजस्थान संघ के निर्माण के बाद तत्कालीन भारत सरकार ने अपना ध्यान देशी रियासतों जोधपुर , जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर पर केन्द्रित किया और इसमें सफलता भी हाथ लगी और इन चारों रियासतो का विलय करवाकर तत्कालीन भारत सरकार ने तीस मार्च 1949 को वृहत्तर राजस्थान संघ का निर्माण किया, जिसका उदघाटन भारत सरकार के तत्कालीन रियासती और गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किया। यही ३० मार्च आज राजस्थान की स्थापना का दिन माना जाता है। इस कारण इस दिन को हर साल राजस्थान दिवस के रूप में मनाया जाता है। हालांकि अभी तक चार देशी रियासतो का विलय होना बाकी था, मगर इस विलय को इतना महत्व नहीं दिया जाता, क्योंकि जो रियासते बची थी वे पहले चरण में ही 'मत्स्य संघ' के नाम से स्वतंत्र भारत में विलय हो चुकी थी। अलवर , भतरपुर, धौलपुर व करौली नामक इन रियासतो पर भारत सरकार का ही आधिपत्य था इस कारण इनके राजस्थान में विलय की तो मात्र औपचारिकता ही होनी थी।
    पांचवा चरण 15 अप्रेल 1949
    पन्द्रह अप्रेल 1949 को मत्स्य संध का विलय ग्रेटर राजस्थान में करने की औपचारिकता भी भारत सरकार ने निभा दी। भारत सरकार ने 18 मार्च 1948 को जब मत्स्य संघ बनाया था तभी विलय पत्र में लिख दिया गया था कि बाद में इस संघ का राजस्थान में विलय कर दिया जाएगा। इस कारण भी यह चरण औपचारिकता मात्र माना गया।
    छठा चरण 26 जनवरी 1950
    भारत का संविधान लागू होने के दिन 26 जनवरी 1950 को सिरोही रियासत का भी विलय ग्रेटर राजस्थान में कर दिया गया। इस विलय को भी औपचारिकता माना जाता है क्योंकि यहां भी भारत सरकार का नियंत्रण पहले से ही था। दरअसल जब राजस्थान के एकीकरण की प्रक्रिया चल रही थी, तब सिरोही रियासत के शासक नाबालिग थे। इस कारण सिरोही रियासत का कामकाज दोवागढ की महारानी की अध्यक्षता में एजेंसी कौंसिल ही देख रही थी जिसका गठन भारत की सत्ता हस्तांतरण के लिए किया गया था। सिरोही रियासत के एक हिस्से आबू देलवाडा को लेकर विवाद के कारण इस चरण में आबू देलवाडा तहसील को बंबई और शेष रियासत विलय राजस्थान में किया गया।
    सांतवा चरण एक नवंबर 1956
    अब तक अलग चल रहे आबू देलवाडा तहसील को राजस्थान के लोग खोना नही चाहते थे, क्योंकि इसी तहसील में राजस्थान का कश्मीर कहा जाने वाला आबूपर्वत भी आता था , दूसरे राजस्थानी, बच चुके सिरोही वासियों के रिश्तेदार और कईयों की तो जमीन भी दूसरे राज्य में जा चुकी थी। आंदोलन हो रहे थे, आंदोलन कारियों के जायज कारण को भारत सरकार को मानना पडा और आबू देलवाडा तहसील का भी राजस्थान में विलय कर दिया गया। इस चरण में कुछ भाग इधर उधर कर भौगोलिक और सामाजिक त्रुटि भी सुधारी गया। इसके तहत मध्यप्रदेश में शामिल हो चुके सुनेल थापा क्षेत्र को राजस्थान में मिलाया गया और झालावाड जिले के उप जिला सिरनौज को मध्यप्रदेश को दे दिया गया।
    इसी के साथ आज से राजस्थान का निर्माण या एकीकरण पूरा हुआ। जो राजस्थान के इतिहास का एक अति महत्ती कार्य था


    पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार राजस्थान का इतिहास पूर्व पाषाणकाल से प्रारंभ होता है। आज से करीब एक लाख वर्ष पहले मनुष्य मुख्यतः बनास नदी के किनारे याअरावली के उस पार की नदियों के किनारे निवास करता था। आदिम मनुष्य अपने पत्थर के औजारों की मदद से भोजन की तलाश में हमेशा एक स्थान से दूसरे स्थान को जाते रहते थे, इन औजारों के कुछ नमूने बैराठ, रैध और भानगढ़ के आसपास पाए गए हैं।
    अतिप्राचीनकाल में उत्तर-पश्चिमी राजस्थान वैसा बीहड़ मरुस्थल नहीं था जैसा वह आज है। इस क्षेत्र से होकर सरस्वती और दृशद्वती जैसी विशाल नदियां बहा करती थीं। इन नदी घाटियों में हड़प्पा, ‘ग्रे-वैयर’ और रंगमहल जैसी संस्कृतियां फली-फूलीं। यह वही ब्रह्मावर्त है जिसकी महती चर्चा मनु ने की है। यहां की गई खुदाइयों से खासकरकालीबंग के पास, पांच हजार साल पुरानी एक विकसित नगर सभ्यता का पता चला है। हड़प्पा, ‘ग्रे-वेयर’ और रंगमहल संस्कृतियां सैकडों किलोमीटर दक्षिण तक राजस्थान के एक बहुत बड़े इलाके में फैली हुई थीं।
    इस बात के प्रमाण मौजूद हैं कि ईसा पूर्व चौथी सदी और उसके पहले यह क्षेत्र कई छोटे-छोटे गणराज्यों में बंटा हुआ था। इनमें से दो गणराज्य मालवा और सिविइतने शक्तिशाली थे कि उन्होंने सिकंदर महान को पंजाब से सिंध की ओर लौटने के लिए बाध्य कर दिया था। उस समय उत्तरी बीकानेर पर एक गणराज्यीय योद्धा कबीले यौधेयत का अधिकार था। महाभारत में उल्लिखित मत्स्य पूर्वी राजस्थान और जयपुर के एक बड़े हिस्से पर शासन करते थे। जयपुर से 80 कि.मी. उत्तर मेंबैराठ, जो तब 'विराटनगर' कहलाता था, उनकी राजधानी थी। इस क्षेत्र की प्राचीनता का पता अशोक के दो शिलालेखों और चौथी पांचवी सदी के बौद्ध मठ के भग्नावशेषों से भी चलता है।
    भरतपुर, धौलपुर और करौली उस समय सूरसेन जनपद के अंश थे जिसकी राजधानी मथुरा थी। भरतपुर के नोह नामक स्थान में अनेक उत्तर-मौर्यकालीन मूर्तियां और बर्तन खुदाई में मिले हैं। शिलालेखों से ज्ञात होता है कि कुषाणकाल तथा कुषाणोत्तर तृतीय सदी में उत्तरी एवं मध्यवर्ती राजस्थान काफी समृद्ध इलाका था। राजस्थान के प्राचीन गणराज्यों ने अपने को पुनर्स्थापित किया और वे मालवा गणराज्य के हिस्से बन गए। मालवा गणराज्य हूणों के आक्रमण के पहले काफी स्वायत्त् और समृद्ध था। अंततः छठी सदी में तोरामण के नेतृत्तव में हूणों ने इस क्षेत्र में काफी लूट-पाट मचाई और मालवा पर अधिकार जमा लिया। लेकिन फिर यशोधर्मन नेहूणों को परास्त कर दिया और दक्षिण पूर्वी राजस्थान में गुप्तवंश का प्रभाव फिर कायम हो गया। सातवीं सदी में पुराने गणराज्य धीरे-धीरे अपने को स्वतंत्र राज्यों के रूप में स्थापित करने लगे। इनमें से मौर्यों के समय में चित्तौड़ गुबिलाओं के द्वारा मेवाड़ और गुर्जरों के अधीन पश्चिमी राजस्थान का गुर्जरात्र प्रमुख राज्य थे।
    लगातार होने वाले विदेशी आक्रमणों के कारण यहां एक मिली-जुली संस्कृति का विकास हो रहा था। रूढ़िवादी हिंदुओं की नजर में इस अपवित्रता को रोकने के लिए कुछ करने की आवश्यकता थी। सन् 647 में हर्ष की मृत्यु के बाद किसी मजबूत केंद्रीय शक्ति के अभाव में स्थानीय स्तर पर ही अनेक तरह की परिस्थितियों से निबटा जाता रहा। इन्हीं मजबूरियों के तहत पनपे नए स्थानीय नेतृत्व में जाति-व्यवस्था और भी कठोर हो गई।


    क्या इन टोटको से भर्ष्टाचार खत्म हो सकता है ? आप देखिए कि अन्ना कैसे-कैसे बयान दे रहे हैं? शरद पवार भ्रष्ट हैं। भ्रष्टाचार पर बनी जीओएम (मंत्रिसमूह) में फला-फलां और फलां मंत्री हैं। इसलिए इस समिति का कोई भविष्य नहीं है। पवार को तो मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे देना चाहिए। पवार का बचाव करने की कोई जरूरत नहीं है। अगर पवार के मंत्रिमंडल से बाहर हो जाने से भ्रष्टाचार